आज: वैदिक ज्योतिष · प्राचीन · सटीक · मुफ्त
खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIबुधवार, 12 अगस्त 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
VedicBirth
वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

वैदिक नक्षत्र मार्गदर्शिका

उत्तर भाद्रपद

उत्तर भाद्रपद नक्षत्र, स्वभाव, करियर और विशेषताएं

स्वामी शनि · देवता अहिर्बुध्न्य · प्रतीक युग्म (जुड़वाँ)

स्वामी ग्रह

शनि

देवता

अहिर्बुध्न्य

प्रतीक

युग्म (जुड़वाँ)

दशा काल

19 वर्ष

परिचय

उत्तर भाद्रपद नक्षत्र मीन राशि में ३°२०' से १६°४०' तक स्थित है और इसका स्वामी शनि है। अहिर्बुध्न्य, गहरे जल का सर्प, ब्रह्मांडीय महासागर की गहराई के देव, की अध्यक्षता में यह नक्षत्र गहन ज्ञान, करुणा, ध्यान और मोक्ष की ओर यात्रा का प्रतीक है। युग्म का प्रतीक द्वंद्व और एकता का, यह दर्शाता है कि उत्तर भाद्रपद जातक जीवन के दोनों पक्षों को जोड़ने की शक्ति रखते हैं।

स्वभाव

उत्तर भाद्रपद जातक गहरे, शांत, करुणाशील और आध्यात्मिक रूप से परिपक्व होते हैं, इनकी गहराई की थाह लगाना कठिन होता है। शनि का धैर्य और अहिर्बुध्न्य की ब्रह्मांडीय गहराई मिलकर इन्हें असाधारण ज्ञानी और मानव-सेवी बनाती है। छाया पक्ष में ये अत्यधिक आत्मकेंद्रित और संसार से उदासीन हो सकते हैं।

करियर

आध्यात्मिक शिक्षण, योग, ध्यान, सामाजिक सेवा, चिकित्सा और मनोविज्ञान में उत्तर भाद्रपद जातक मार्गदर्शक भूमिका निभाते हैं। शनि के संरचनात्मक प्रभाव से ये प्रशासन, कानून और शिक्षण संस्थानों में भी दीर्घकालिक सफलता पाते हैं।

संबंध और विवाह

उत्तर भाद्रपद जातक गहरे प्रेमी होते हैं जो साथी में आत्मा की समझ ढूंढते हैं। विवाह प्रायः उम्र के साथ परिपक्व और स्थिर होता है, ये अपने परिवार को अगाध करुणा और धैर्य से संभालते हैं।

स्वास्थ्य

उत्तर भाद्रपद जातकों को पाँव, प्रतिरक्षा-तंत्र और लसीका-तंत्र पर ध्यान देना चाहिए। शनि के प्रभाव से जोड़ों का दर्द और अवसाद संभव है, नियमित ध्यान और पर्याप्त नींद अनिवार्य है।

चार पाद

  1. प्रथम चरण (सिंह नवमांश, सूर्य): सूर्य की जागरूकता और शनि की गहराई, स्वतंत्र आत्मा जो सत्य को प्रकाशित करने के लिए जन्मी है।
  2. द्वितीय चरण (कन्या नवमांश, बुध): बुध का विश्लेषण, इन जातकों में आध्यात्मिक ज्ञान को व्यावहारिक सेवा में रूपांतरित करने की विशेष क्षमता।
  3. तृतीय चरण (तुला नवमांश, शुक्र): शुक्र की करुणा और सौंदर्य, सामाजिक न्याय, कला और संतुलन का नक्षत्र।
  4. चतुर्थ चरण (वृश्चिक नवमांश, मंगल): मंगल की दृढ़ता और शनि की गहराई, मोक्ष-मार्ग पर सबसे तीव्र साधक, परिवर्तनकारी शक्ति।

सामान्य प्रश्न

अहिर्बुध्न्य देवता कौन हैं?

अहिर्बुध्न्य एक रहस्यमय वैदिक देव हैं जिनका नाम "गहरे जल का सर्प" या "ब्रह्मांडीय नाग" के रूप में अनुवाद होता है। ये रुद्र के ग्यारह रूपों में से एक हैं और समुद्र की अतल गहराई के अधिपति हैं। उत्तर भाद्रपद जातकों में इनकी गहराई, धैर्य और परिवर्तनकारी शक्ति का अंश होता है।

उत्तर भाद्रपद और पूर्व भाद्रपद में क्या अंतर है?

पूर्व भाद्रपद अग्नि और उग्रता का, वह तलवार जो माया को काटती है। उत्तर भाद्रपद जल और करुणा का, वह गहराई जो सब कुछ समेट लेती है। पूर्व भाद्रपद विनाश से पूर्णता खोजता है, उत्तर भाद्रपद ध्यान और प्रेम से। दोनों मिलकर मोक्ष के दो मार्ग दर्शाते हैं।

उत्तर भाद्रपद को मोक्ष का नक्षत्र क्यों कहते हैं?

शनि का अनुशासन और अहिर्बुध्न्य की अगाध गहराई मिलकर उत्तर भाद्रपद को आत्म-साक्षात्कार के लिए सबसे अनुकूल नक्षत्रों में से एक बनाती है। मीन राशि स्वयं मोक्ष और विसर्जन की राशि है, और इसमें स्थित यह नक्षत्र उस मोक्ष-यात्रा को गहरा करता है।

उत्तर भाद्रपद नक्षत्र के बच्चों के नाम

सभी 286 नाम देखें →
त्रिशाTrisha

त्रिशा, तृष्णा, आकांक्षा

जुहीJuhi

जुही, चमेली, सफेद सुगंधित फूल, रात को महकने वाली

चारुCharu

चारु, सुंदर, मनोहर, प्रिय, कोमल

दयालDayal

the compassionate one

दावीDaivi

दावी, दावेदार, अपने सत्य पर दृढ़ रहने वाली

दूर्वाDurva

दूर्वा, दूब घास, गणेश को प्रिय, सदाबहार

नाम के आद्याक्षर: दू, थ, झ, ञ (Du, Tha, Jha, Da)

अन्य नक्षत्र

अश्विनीभरणीकृत्तिकारोहिणीमृगशिराआर्द्रापुनर्वसुपुष्यसभी नक्षत्र →
अपनी कुंडली देखें →दैनिक राशिफल →English Guide →