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वैदिक नक्षत्र मार्गदर्शिका

रोहिणी

रोहिणी नक्षत्र, स्वभाव, करियर और विशेषताएं

स्वामी चंद्र · देवता ब्रह्मा · प्रतीक बैलगाड़ी

स्वामी ग्रह

चंद्र

देवता

ब्रह्मा

प्रतीक

बैलगाड़ी

दशा काल

10 वर्ष

परिचय

रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि में स्थित चौथा नक्षत्र है और इसे सभी नक्षत्रों में सर्वाधिक सुंदर, उर्वर और मनमोहक माना जाता है। इसके अधिदेवता सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं जो रचनात्मकता और प्रकृति की प्रचुरता के प्रतीक हैं। चंद्रमा का यह सबसे प्रिय नक्षत्र है, चंद्र यहाँ अपनी पूर्ण महिमा में होता है।

स्वभाव

रोहिणी जातक सौंदर्यप्रिय, सुसंस्कृत, भावुक और अत्यंत आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं, इनकी उपस्थिति ही कक्ष को जीवंत बना देती है। ये पृथ्वी के सुखों का, भोजन, संगीत, कला और प्रकृति का, पूरी तरह आनंद लेते हैं। छाया-पक्ष में भोगविलास की अधिकता, ईर्ष्या और अधिकारभाव इन्हें परेशानी में डाल सकता है।

करियर

रोहिणी जातक कला, संगीत, फैशन, खाद्य-उद्योग, कृषि, बागवानी और मनोरंजन जगत में असाधारण सफलता पाते हैं। चंद्र की रचनात्मकता और ब्रह्मा की सृजन-शक्ति इन्हें किसी भी सौंदर्य-संबंधी क्षेत्र में अग्रणी बनाती है।

संबंध और विवाह

प्रेम में रोहिणी जातक गहरे, रोमांटिक और समर्पित होते हैं, इनका साथ पाना सौभाग्य की बात है। परंतु इनकी अपेक्षाएं बहुत ऊँची होती हैं और ईर्ष्यालु प्रवृत्ति संबंधों में जटिलता ला सकती है।

स्वास्थ्य

रोहिणी नक्षत्र का संबंध मुख, गले और स्वर-तंत्र से है; गले के संक्रमण और थायरॉइड की समस्याएँ सामान्य हैं। भोग-विलास की अधिकता से पाचन और वजन पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

चार पाद

  1. प्रथम पाद मेष नवांश में है, मंगल का प्रभाव रोहिणी की कोमलता में ऊर्जा और साहस का मिश्रण करता है, जिससे जातक कलात्मक उद्यमी बनते हैं।
  2. द्वितीय पाद वृषभ नवांश में है, शुक्र-चंद्र का युग्म असाधारण सौंदर्यबोध, संगीत-प्रतिभा और भौतिक समृद्धि देता है।
  3. तृतीय पाद मिथुन नवांश में है, बुध का प्रभाव व्यापार-बुद्धि, वाक्-चातुर्य और सामाजिकता को विकसित करता है।
  4. चतुर्थ पाद कर्क नवांश में है, चंद्र-चंद्र का योग अत्यंत संवेदनशील, मातृ-भावपूर्ण और रचनात्मक व्यक्तित्व निर्मित करता है।

सामान्य प्रश्न

रोहिणी नक्षत्र को इतना शुभ क्यों माना जाता है?

रोहिणी नक्षत्र चंद्रमा का सर्वाधिक प्रिय नक्षत्र है और चंद्र यहाँ उच्च-स्थानीय बल में होता है। इसके अधिदेवता ब्रह्मा की सृजन-शक्ति और शुक्र-सम वृषभ राशि का संयोजन इसे सभी सांसारिक सुखों और समृद्धि का प्रतीक बनाता है।

रोहिणी नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति का स्वभाव कैसा होता है?

रोहिणी जातक स्वभाव से सौम्य, सुंदर और आकर्षक होते हैं। इनमें कला और प्रकृति के प्रति गहरा प्रेम होता है। ये जीवन के सुखों का पूर्ण आनंद लेते हैं और अपने आसपास के लोगों को भी खुश रखने में सिद्धहस्त होते हैं।

रोहिणी नक्षत्र का प्रतीक बैलगाड़ी क्यों है?

बैलगाड़ी कृषि, परिश्रम, उर्वरता और भार वहन करने की क्षमता का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि रोहिणी नक्षत्र पृथ्वी की उत्पादकता और धैर्यपूर्वक कार्य करने की शक्ति से जुड़ा है। जैसे बैल भूमि जोतकर फसल उगाता है, वैसे ही रोहिणी जातक परिश्रम से समृद्धि अर्जित करते हैं।

रोहिणी नक्षत्र के बच्चों के नाम

सभी 392 नाम देखें →
विवानVivaan

full of life

ओमOm

ओम, प्रणव, सृष्टि का मूल स्वर, "अ-उ-म" का संयोग

वन्याVanya

of the forest

ओवियाOviya

beautiful drawing

वामिकाWamika

Goddess Durga

ओजसOjas

ओजस, जीवनी शक्ति, तेज, ऊर्जा

नाम के आद्याक्षर: ओ, वा, वि, वु (O, Va, Vi, Vu)

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