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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

वैदिक नक्षत्र मार्गदर्शिका

रेवती

रेवती नक्षत्र, स्वभाव, करियर और विशेषताएं

स्वामी बुध · देवता पूषन · प्रतीक मछली

स्वामी ग्रह

बुध

देवता

पूषन

प्रतीक

मछली

दशा काल

17 वर्ष

परिचय

रेवती नक्षत्र मीन राशि के अंतिम भाग में १६°४०' से ३०° तक स्थित है और इसका स्वामी बुध है। पूषन, मार्गदर्शक, यात्रियों के रक्षक और पशुओं के पालनहार देव, की अध्यक्षता में यह नक्षत्र सुरक्षित यात्रा, पोषण और संपूर्ण ब्रह्मांडीय चक्र के समापन का प्रतीक है। मछली का प्रतीक स्वाभाविक प्रवाह, अनुकूलनशीलता और गहरे आध्यात्मिक जल में तैरने की क्षमता दर्शाता है।

स्वभाव

रेवती जातक कोमल, करुणाशील, कलाप्रेमी और स्वाभाविक रूप से पोषण देने वाले होते हैं, ये हर किसी के लिए सुरक्षित आश्रय बन जाते हैं। बुध की कुशाग्र बुद्धि और पूषन के मार्गदर्शन से ये अत्यंत संवेदनशील, सहज-ज्ञानी और सृजनशील होते हैं। छाया पक्ष में ये अत्यधिक भावुक, आदर्शवादी और व्यावहारिकता से कट सकते हैं।

करियर

कला, संगीत, नृत्य, शिक्षा, चिकित्सा, पशु-चिकित्सा और परामर्श में रेवती जातक असाधारण योगदान देते हैं। पूषन के मार्गदर्शक स्वभाव से ये गाइड, काउंसलर, शिक्षक और आध्यात्मिक नेता के रूप में भी सफल होते हैं।

संबंध और विवाह

रेवती जातक प्रेम में गहरे, रोमांटिक और बिना शर्त प्रेम करने वाले होते हैं, ये साथी की हर आवश्यकता को अपनी आवश्यकता मानते हैं। इनकी अत्यधिक देखभाल कभी-कभी सीमाएं मिटा देती है, इसलिए इन्हें स्वस्थ व्यक्तिगत सीमाएं बनाना सीखना होता है।

स्वास्थ्य

रेवती जातकों को पाँव, रोग-प्रतिरोधक तंत्र और मानसिक संतुलन पर ध्यान देना चाहिए। अत्यधिक भावनात्मक संवेदनशीलता से बचने के लिए ध्यान, योग और प्रकृति में समय बिताना अत्यंत लाभकारी है।

चार पाद

  1. प्रथम चरण (धनु नवमांश, गुरु): गुरु और बुध का योग, दार्शनिक मार्गदर्शन, धर्म और आध्यात्मिक शिक्षण में श्रेष्ठ।
  2. द्वितीय चरण (मकर नवमांश, शनि): शनि का अनुशासन रेवती की कोमलता को व्यावहारिक सेवा में परिणत करता है।
  3. तृतीय चरण (कुंभ नवमांश, शनि): मानवतावादी दृष्टि, ये जातक समाज-सेवा और सामूहिक कल्याण में अग्रणी होते हैं।
  4. चतुर्थ चरण (मीन नवमांश, गुरु): मीन में मीन नवमांश, संपूर्ण ब्रह्मांडीय चक्र का समापन बिंदु। सर्वाधिक आध्यात्मिक और करुणामय चरण, मोक्ष का द्वार।

सामान्य प्रश्न

रेवती नक्षत्र को राशिचक्र का अंतिम नक्षत्र क्यों माना जाता है?

रेवती मीन राशि के अंतिम अंश में स्थित है और २७ नक्षत्रों में अंतिम है, इसलिए यह पूरे नक्षत्र-चक्र का समापन बिंदु है। जैसे मीन राशि राशिचक्र का समापन करती है, रेवती नक्षत्र उस ज्ञान और अनुभव को समेटती है जो सभी २७ नक्षत्रों में अर्जित हुआ। इसके बाद अश्विनी से नया चक्र आरंभ होता है।

पूषन देवता का रेवती से क्या संबंध है?

पूषन वैदिक देवताओं में मार्गदर्शक और यात्रियों के रक्षक हैं, ये लोगों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाते हैं। रेवती के संदर्भ में पूषन आत्मा को ब्रह्मांडीय यात्रा में मार्गदर्शन करते हैं। रेवती जातकों में यही मार्गदर्शक गुण होता है, ये दूसरों की आत्मिक यात्रा में सहायक होते हैं।

रेवती नक्षत्र में जन्मे जातकों का स्वभाव इतना कोमल क्यों होता है?

मीन राशि की जलीय भावनात्मकता, बुध की संवेदनशील बुद्धि और पूषन की पालनकारी प्रकृति, तीनों मिलकर रेवती को सबसे कोमल और करुणाशील नक्षत्र बनाती हैं। यह कोमलता दुर्बलता नहीं बल्कि वह शक्ति है जो बड़े से बड़े दर्द को भी प्रेम से ठीक कर देती है।

रेवती नक्षत्र के बच्चों के नाम

सभी 336 नाम देखें →
देवDev

god

चारवीCharvi

चारवी, सुंदर, मनोहर, आकर्षक

चिरागChirag

the lamp

देवांशDevansh

देवांश, देव का अंश, दिव्यांश, ईश्वर का भाग

राधिकाRadhika

राधिका, सफल, समृद्ध, प्रिय

चतुराChatura

चतुर, होशियार, दक्ष

नाम के आद्याक्षर: दे, दो, चा, ची (De, Do, Cha, Chi)

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