तांत्रिक मंत्र · देवी वाराही (वराह-मुखी शक्ति, देवी की सेनापति)
वाराही मंत्र
Varahi Mantra
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ ह्रीं ऐं क्लीं वाराह्यै नमः
रोमन लिपि
Om Hreem Aim Kleem Varahyai Namah
अर्थ
ॐ — आद्य ध्वनि। ह्रीं (भुवनेश्वरी बीज), ऐं (सरस्वती बीज), क्लीं (काम/काली बीज) — तीन महाशक्ति बीज संयुक्त। वाराह्यै — वाराही देवी को, वराह-मुखी देवी, दंडनाथा (दंड की धारक), ललिता त्रिपुर सुंदरी की सेनापति। नमः — मैं प्रणाम करता हूँ, समर्पित होता हूँ।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
वाराही मंत्र के लाभ
- ·तीव्र, तत्काल सुरक्षा प्रदान करती हैं — वाराही देवी की सेना की सेनापति हैं और खतरों के खिलाफ तेजी से कार्य करती हैं
- ·शत्रुओं को नष्ट करती हैं और काला जादू, तांत्रिक आक्रमण या मानसिक आक्रामकता का उपयोग करने वालों को निष्क्रिय करती हैं
- ·ग्रह दोषों, विशेषकर शनि और राहु द्वारा उत्पन्न बाधाओं को दूर करती हैं
- ·भौतिक समृद्धि, कृषि और भूमि मामलों में सफलता और खाद्य सुरक्षा प्रदान करती हैं
- ·प्रभावशाली उपस्थिति, नेतृत्व क्षमता और अधिकार के साथ दूसरों को निर्देशित करने की शक्ति विकसित करती हैं
- ·बच्चों और घर की सुरक्षा के लिए अत्यंत प्रभावी — वाराही को घरों की सर्वोच्च रक्षक के रूप में पूजा जाता है
जाप विधि
- 1.गहरे नीले या काले आसन पर उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर मुंह करें — वाराही उत्तर दिशा की अधिष्ठात्री हैं
- 2.नीले-काले फूल, काले अंगूर या जामुन अर्पित करें; सरसों के तेल का दीपक; गुड़ के साथ मिश्रित तिल
- 3.संध्याकाल या मध्यरात्रि में जप करें — वाराही की शक्ति संधि काल में सबसे अधिक सुलभ है
- 4.क्रिस्टल या रुद्राक्ष माला का उपयोग करें; दृढ़, आदेशात्मक स्वर में जपें — वाराही साहस पर प्रतिक्रिया देती हैं
- 5.वाराही का ध्यान करें — गहरे रंग की, वराह का मुख लिए, भैंसे पर सवार, हल, चक्र, गदा और पाश लिए हुए
- 6.घर की सुरक्षा के लिए: भोजपत्र पर हल्दी से ॐ ह्रीं ऐं क्लीं वाराह्यै नमः लिखें और मुख्य द्वार पर रखें
जाप का सर्वोत्तम समय
संध्याकाल या मध्यरात्रि। मंगलवार और शनिवार। अष्टमी तिथि। नवरात्रि के दौरान — विशेषकर आठवीं रात। वाराही जयंती (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी)।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार (1 माला)। सुरक्षा उद्देश्यों के लिए: अष्टमी पर 1008 बार। पुरश्चरण: 1.25 लाख।
सामान्य प्रश्न
प्र.वाराही कौन हैं और सप्त मातृकाओं से उनका क्या संबंध है?
वाराही सप्त मातृकाओं (सात दिव्य माताओं) में से एक हैं — देवी-ऊर्जाएँ जो अंधकासुर से लड़ने के लिए प्रमुख पुरुष देवताओं के शरीर से उत्पन्न हुईं। वाराही भगवान वराह (विष्णु के वराह अवतार) से उत्पन्न हुईं। श्री विद्या परंपरा में वह दंडनाथा — ललिता त्रिपुर सुंदरी की सेनापति — के रूप में और ऊँचाई पर हैं।
प्र.दक्षिण भारत में वाराही की पूजा इतनी प्रमुख क्यों है?
तमिलनाडु और केरल में वाराही (पंचमी कहलाती हैं) की गहन पूजा की जाती है, जहाँ उन्हें समर्पित अनेक मंदिर हैं। दक्षिण भारतीय शाक्त परंपरा में वाराही को विशेष रूप से तंत्र-रक्षा, शत्रु-निवारण और परिवार की सुरक्षा के लिए पूजा जाता है।