तांत्रिक मंत्र · देवी चण्डिका (नवार्ण स्वरूप)
नवार्ण मंत्र
Navarna Mantra
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
रोमन लिपि
Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Vichche
अर्थ
ॐ — आद्य ध्वनि। ऐं — सरस्वती का बीज (ज्ञान)। ह्रीं — भुवनेश्वरी का बीज (माया और सृष्टि)। क्लीं — काम और काली का बीज (इच्छा और संहार)। चामुण्डायै — देवी चामुण्डा को जिन्होंने चण्ड-मुण्ड का वध किया। विच्चे — विच्छेद और मुक्ति का बीज। एकसाथ: मैं उस परम देवी को समर्पित हूँ जो सृष्टि, पालन और संहार सब को समाहित करती हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
नवार्ण मंत्र के लाभ
- ·सभी दस महाविद्याओं का द्वार खोलता है — तांत्रिक देवी परंपरा का मास्टर-की मंत्र माना जाता है
- ·तीनों प्रकार के शत्रुओं को नष्ट करता है: बाहरी शत्रु, आंतरिक नकारात्मक प्रवृत्तियाँ, और कर्मिक बाधाएँ
- ·एक ही मंत्र में सरस्वती (ऐं), लक्ष्मी (ह्रीं) और काली (क्लीं) की संयुक्त शक्ति प्रदान करता है
- ·काला जादू, बुरी नजर, मानसिक आक्रमण और सभी प्रकार के नकारात्मक तंत्र से सुरक्षा करता है
- ·संपूर्ण सूक्ष्म शरीर को शुद्ध करता है — सही भाव और नियमितता के साथ जपने पर सातों चक्र जाग्रत होते हैं
- ·दुर्गा सप्तशती (चण्डी पाठ) के लिए आवश्यक पूर्व-मंत्र — पाठक को पवित्र करता है
जाप विधि
- 1.नवरात्रि या किसी शुभ चंद्र दिवस पर लाल या गहरे लाल आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठें
- 2.घी का दीपक जलाएं और देवी को लाल फूल (गुड़हल या गुलाब), कुमकुम और ताजे फल अर्पित करें
- 3.प्रत्येक सत्र की शुरुआत तीन बार ॐ जपकर करें, फिर नवार्ण मंत्र पर आएं
- 4.नौ अक्षरों में से प्रत्येक पर पूरी एकाग्रता के साथ जपें — प्रत्येक में एक विशिष्ट स्पंदन गुण है
- 5.प्रत्येक जाप के साथ कल्पना करें कि सुनहरी-लाल आभा आपको घेर रही है, सभी बाधाओं और भय को दूर कर रही है
- 6.दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए: चण्डी पाठ शुरू करने से पहले और पूरा करने के बाद 108 बार नवार्ण मंत्र जपें
जाप का सर्वोत्तम समय
ब्रह्म मुहूर्त (4–6 बजे)। नवरात्रि की नौ रातें। अष्टमी और नवमी तिथियाँ। सूर्योदय के समय कोई भी मंगलवार या शुक्रवार।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार (1 माला)। नवरात्रि साधना के लिए: प्रतिदिन 9 माला (972 बार)। पुरश्चरण: 9 लाख जाप।
सामान्य प्रश्न
प्र."नवार्ण" का क्या अर्थ है और इसमें 9 अक्षर क्यों हैं?
नवार्ण का अर्थ है "नौ अक्षर" (नव = नौ, अर्ण = अक्षर)। तांत्रिक अंकशास्त्र में नौ पूर्णता की संख्या है और नवदुर्गा (दुर्गा के नौ रूप) की संख्या है। देवी भागवत पुराण और तंत्रसार दोनों नवार्ण को देवी परंपरा का मूल मंत्र बताते हैं।
प्र.क्या बिना दीक्षा के नवार्ण मंत्र का जप किया जा सकता है?
पारंपरिक तांत्रिक गुरु पूर्ण नवार्ण साधना के लिए दीक्षा की सिफारिश करते हैं। लेकिन अनेक आधुनिक देवी मंदिर और शिक्षक मानते हैं कि ईमानदार भक्तिपूर्ण जप — विशेषकर दुर्गा सप्तशती पाठ के संदर्भ में — सभी साधकों के लिए खुला है। नवरात्रि के दौरान पहली बार अभ्यास करना उचित है।