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वैदिक मंत्र · भगवान सूर्य देव

सूर्य गायत्री मंत्र

Surya Gayatri Mantra

प्रकारवैदिक मंत्र
देवताभगवान सूर्य देव
अक्षर24

संस्कृत (देवनागरी)

ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्

रोमन लिपि

Om Bhaskaraya Vidmahe Mahatejaya Dhimahi Tanno Suryah Prachodayat

अर्थ

हम भास्कर (प्रकाश बनाने वाले) को जानते हैं, महातेज का ध्यान करते हैं — सूर्य देव हमें प्रेरित और प्रकाशित करें।

अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र

सूर्य गायत्री मंत्र के लाभ

  • ·जीवनशक्ति, स्पष्टता, नेतृत्व और स्वास्थ्य के लिए सीधे सूर्य का आह्वान
  • ·कुंडली में सूर्य मजबूत होता है — करियर, आत्मविश्वास, अधिकार में सुधार
  • ·ऊर्जा, प्रतिरक्षा और नेत्र स्वास्थ्य बढ़ता है
  • ·कमजोर सूर्य वाले लोगों के लिए सबसे शक्तिशाली गायत्री
  • ·सरकारी सेवा, राजनीति और शक्ति के पदों में बाधाएँ दूर होती हैं
  • ·सूर्य गायत्री सार्वभौमिक गायत्री मंत्र (सावित्री) का प्रत्यक्ष रूप है

जाप विधि

  1. 1.रविवार सूर्योदय पर — पूर्व दिशा में उगते सूर्य को अर्घ्य दें
  2. 2.तीनों संध्याएँ (सूर्योदय, मध्याह्न, सूर्यास्त) शुभ हैं
  3. 3.लाल मूँगे की माला
  4. 4.सार्वभौमिक गायत्री मंत्र और सूर्य बीज मंत्र के साथ जप सकते हैं
  5. 5.अभ्यास के दौरान रविवार को लाल या नारंगी वस्त्र पहनें
  6. 6.जाप करते समय सुनहरे सौर चक्र की कल्पना करें

जाप का सर्वोत्तम समय

रविवार सूर्योदय पर। प्रतिदिन तीनों संध्याएँ। तीव्र अभ्यास के लिए सूर्य ग्रहण।

अनुशंसित जाप संख्या

प्रत्येक संध्या 108 बार। पितृ दोष के लिए: 40 दिन प्रतिदिन 108 बार।

सामान्य प्रश्न

प्र.सूर्य गायत्री और गायत्री मंत्र में क्या संबंध है?

सार्वभौमिक गायत्री मंत्र सावित्री (दिव्य सौर शक्ति) को संबोधित है — यह मूलतः सूर्य मंत्र है लेकिन ब्रह्मांडीय स्तर पर। सूर्य गायत्री व्यक्तिगत, देव-विशिष्ट रूप है।

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