वैदिक मंत्र · भगवान चंद्र देव
चंद्र गायत्री मंत्र
Chandra Gayatri Mantra
प्रकारवैदिक मंत्र
देवताभगवान चंद्र देव
अक्षर24
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्
रोमन लिपि
Om Kshiraputraya Vidmahe Amritattvaya Dhimahi Tanno Chandrah Prachodayat
अर्थ
हम क्षीर सागर के पुत्र (क्षीरपुत्र, चंद्र ब्रह्मांडीय मंथन से प्रकट हुए) को जानते हैं, अमृत तत्व का ध्यान करते हैं, चंद्र हमें प्रेरित और प्रकाशित करें।
अंतिम अपडेट: 17 अगस्त 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
चंद्र गायत्री मंत्र के लाभ
- ·भावनात्मक संतुलन के लिए चंद्र की शीतल, पोषक ऊर्जा का आह्वान
- ·कुंडली में कमजोर या पीड़ित चंद्र मजबूत होता है
- ·चिंता, अवसाद और मानसिक उथल-पुथल शांत होती है
- ·अंतर्ज्ञान, सहानुभूति और रचनात्मक संवेदनशीलता सुधरती है
- ·पूर्णिमा और सोमवार पर सबसे प्रभावी
- ·अस्थिर भावनाओं या कमजोर चंद्र वाले लोगों के लिए सहायक
जाप विधि
- 1.सोमवार शाम जब चंद्र दिखाई दे
- 2.पूर्णिमा, चंद्र की ओर मुँह करके जपें
- 3.स्फटिक माला या मोती की माला
- 4.शिव जी को सफेद फूल, सफेद चावल और दूध अर्पित करें (चंद्र शिव के मस्तक पर)
- 5.संभव हो तो जल के पास जपें, नदी, झील या साफ जल का पात्र
- 6.एक ही सत्र में चंद्र बीज मंत्र के साथ जप सकते हैं
जाप का सर्वोत्तम समय
सोमवार शाम। पूर्णिमा की रात। सोमवार ब्रह्म मुहूर्त।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार। पूर्णिमा: चंद्र की ओर मुँह करके 1008 बार।
सामान्य प्रश्न
प्र.चंद्र गायत्री मानसिक स्वास्थ्य में कैसे मदद करती है?
वैदिक ज्योतिष में चंद्र मन, भावनाओं और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य का कारक है। चंद्र गायत्री का नियमित जाप भावनात्मक शरीर को स्थिर करता है और चिंता-अवसाद कम करता है।