तांत्रिक मंत्र · माँ दुर्गा (तीन रूप)
दुर्गा सप्तशती बीज मंत्र
Durga Saptashati Beej Mantras
संस्कृत (देवनागरी)
प्रथम चरित्र (महाकाली): ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मध्यम चरित्र (महालक्ष्मी): ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि स्वाहा उत्तर चरित्र (महासरस्वती): ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः
रोमन लिपि
Prathama Charitra (Mahakali): Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Vicche Madhyama Charitra (Mahalakshmi): Om Hreem Shreem Kreem Parameshvari Svaha Uttara Charitra (Mahasaraswati): Om Aim Hreem Shreem Kleem Sauh
अर्थ
दुर्गा सप्तशती (700 श्लोक) में तीन अध्याय हैं, प्रत्येक का अपना बीज मंत्र है। पहला चरित्र महाकाली का आह्वान (तमस/जड़ता का नाशक)। मध्यम चरित्र महालक्ष्मी का आह्वान (पोषक, रज/जुनून का नाशक)। उत्तर चरित्र महासरस्वती का आह्वान (प्रकाशक)। मिलकर ये संपूर्ण ब्रह्मांडीय स्त्री शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
दुर्गा सप्तशती बीज मंत्र के लाभ
- ·सबसे पूर्ण दुर्गा साधना — दिव्य माँ के सभी पहलुओं को समेटती है
- ·ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे सबसे शक्तिशाली तांत्रिक मंत्रों में से एक
- ·तीनों प्रकार की नकारात्मकता नष्ट होती है: तमस, रज, सात्त्विक अहंकार
- ·नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती (सभी 700 श्लोक) का पूर्ण पाठ सभी इच्छाएँ पूरी करता है
- ·सबसे जिद्दी शत्रु और जीवन की बाधाएँ भी दूर होती हैं
- ·साधक के भीतर संपूर्ण शक्ति (दिव्य शक्ति) जागृत होती है
जाप विधि
- 1.नवरात्रि सबसे शुभ समय है — 9 दिनों में पूरी सप्तशती पढ़ें
- 2.दैनिक अभ्यास के लिए: पहला बीज (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे) 108 बार जपें
- 3.पूर्व या उत्तर में; लाल कपड़े पर बैठें; घी का दीपक जलाएँ
- 4.दुर्गा यंत्र या प्रतिमा को लाल गुड़हल के फूल और फल अर्पित करें
- 5.नियमित अभ्यास के लिए मंगलवार और शुक्रवार; पूर्ण पाठ के लिए नवरात्रि के सभी 9 दिन
- 6.पूर्ण सप्तशती पाठ (700 श्लोक) में लगभग 3-4 घंटे लगते हैं
जाप का सर्वोत्तम समय
नवरात्रि की सभी 9 रातें। मंगलवार और शुक्रवार। सबसे तीव्र अभ्यास के लिए अष्टमी।
अनुशंसित जाप संख्या
मुख्य बीज: प्रतिदिन 108 बार। पूरी सप्तशती: नवरात्रि में 1-3 पाठ। पुरश्चरण: 1,000 पूर्ण पाठ।
सामान्य प्रश्न
प्र.दुर्गा सप्तशती क्या है?
दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य या चंडी पाठ) मार्कंडेय पुराण की संस्कृत रचना है। इसमें 700 श्लोकों में माँ दुर्गा की तीन असुरों पर विजय की कथाएँ हैं — प्रत्येक एक अलग प्रकार की ब्रह्मांडीय बुराई का प्रतिनिधित्व करते हैं।