बीज मंत्र · केतु देव (चंद्र का दक्षिण नोड)
केतु बीज मंत्र
Ketu Beej Mantra
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः
रोमन लिपि
Om Straam Streem Straum Sah Ketave Namah
अर्थ
ॐ। केतु को नमस्कार — चंद्र का दक्षिण नोड, अजगर की पूँछ। बीज अक्षर स्त्रां, स्त्रीं, स्त्रौं केतु की आध्यात्मिक, वैराग्यपूर्ण और परलौकिक ऊर्जा का आह्वान करते हैं।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
केतु बीज मंत्र के लाभ
- ·केतु महादशा और अंतर्दशा का प्राथमिक उपाय
- ·केतु के वैराग्य को आध्यात्मिक मुक्ति और ज्ञान में बदलता है
- ·केतु से संबंधित रहस्यमय बीमारियाँ जो चिकित्सा निदान में नहीं आतीं, उन्हें दूर करता है
- ·आध्यात्मिकता, मोक्ष और वैराग्य के मार्ग पर चलने वालों के लिए सहायक
- ·काला जादू और पितृ शाप से सुरक्षा (केतु इन्हें नियंत्रित करता है)
- ·ज्योतिषियों, तांत्रिकों और आध्यात्मिक साधकों के लिए लाभकारी
जाप विधि
- 1.मंगलवार या शनिवार को जपें (केतु मंगल और शनि से जुड़ा है)
- 2.गणेश जी या केतु को रंग-बिरंगे फूल, तिल और कंबल चढ़ाएँ
- 3.लहसुनिया (cat's eye) माला या साधारण लकड़ी की माला
- 4.उत्तर-पश्चिम दिशा में मुँह करके जपें
- 5.केतु व्रत और निःस्वार्थ सेवा (सेवा) से विशेष रूप से प्रसन्न होता है
- 6.केतु और गणेश का गहरा संबंध है, इसलिए गणेश मंत्र साथ जपें
जाप का सर्वोत्तम समय
मंगलवार और शनिवार। राहु काल के दौरान (केतु के लिए भी)। तीव्र अभ्यास के लिए अमावस्या।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार। पुरश्चरण: 17,000 जाप। केतु दशा में: दशा के दौरान मंगलवार-शनिवार 108 बार।
सामान्य प्रश्न
प्र.केतु और राहु में क्या अंतर है?
राहु (उत्तर नोड) भौतिक इच्छाएँ और महत्वाकांक्षा देता है। केतु (दक्षिण नोड) आध्यात्मिक वैराग्य, मुक्ति और भौतिक चीजों को छोड़ने का प्रतिनिधित्व करता है। केतु काल में भौतिक जीवन सिकुड़ता है जबकि आंतरिक आध्यात्मिक जीवन बढ़ता है।
प्र.केतु बीज मंत्र किसे जपना चाहिए?
केतु दशा-अंतर्दशा में, रहस्यमय बीमारियों में, आध्यात्मिक प्रगति चाहने वालों, और काला जादू या पितृ दोष से पीड़ित लोगों को।