वैदिक मंत्र · भगवान इंद्र (देवराज)
इंद्र मंत्र
Indra Mantra
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ इन्द्राय नमः इंद्र गायत्री: ॐ सहस्राक्षाय विद्महे वज्रहस्ताय धीमहि तन्नो इन्द्रः प्रचोदयात्
रोमन लिपि
Om Indraya Namah Indra Gayatri: Om Sahasrakshaya Vidmahe Vajrahastaya Dhimahi Tanno Indrah Prachodayat
अर्थ
ॐ। इंद्र को नमस्कार। इंद्र गायत्री: हम सहस्राक्ष (हजार नेत्रों वाले) को जानते हैं, वज्रधारी का ध्यान करते हैं — इंद्र हमें प्रेरित और प्रकाशित करें।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
इंद्र मंत्र के लाभ
- ·इंद्र — देवताओं के राजा और स्वर्ग के शासक — का आह्वान: शक्ति और संप्रभुता मिलती है
- ·वर्षा और कृषि समृद्धि मिलती है — इंद्र वर्षा के देव हैं
- ·अधिकार के पदों में शत्रुओं और प्रतिपक्षियों पर विजय मिलती है
- ·बृहस्पति मजबूत होता है — इंद्र बृहस्पति ऊर्जा से जुड़े हैं
- ·सरकार, राजनीति या नेतृत्व के पदों में रहने वालों के लिए आदर्श
- ·अधिकार और स्थिति को प्रभावित करने वाले ग्रह स्थितियों के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं
जाप विधि
- 1.गुरुवार प्रातः (बृहस्पति का दिन — इंद्र बृहस्पति से जुड़े हैं)
- 2.पीले फूल, शहद और पीली मिठाई अर्पित करें
- 3.जाप के दौरान पूर्व दिशा में मुँह करें
- 4.सोने या पीले रंग की माला
- 5.कृषि आशीर्वाद के लिए वर्षा ऋतु में जाप करें
- 6.नई अधिकार स्थिति या नेतृत्व भूमिका ग्रहण करने से पहले
जाप का सर्वोत्तम समय
गुरुवार प्रातः। वर्षा ऋतु में। नेतृत्व ग्रहण करने से पहले।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार। विशिष्ट वरदान के लिए: गुरुवार को 1008 बार।
सामान्य प्रश्न
प्र.आज इंद्र की पूजा कम क्यों होती है?
ऋग्वेद में इंद्र सबसे अधिक उल्लिखित देवता हैं (250+ सूक्त) लेकिन आधुनिक हिंदू धर्म में कम पूजे जाते हैं। पुराण काल के बाद भक्ति विष्णु, शिव और देवी की ओर स्थानांतरित हो गई। फिर भी कृषि, वर्षा और शक्ति के लिए इंद्र की ऊर्जा का आह्वान होता है।