वैदिक मंत्र · भगवान विष्णु / नारायण
अष्टाक्षरी मंत्र
Ashtakshari Mantra
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ नमो नारायणाय
रोमन लिपि
Om Namo Narayanaya
अर्थ
ॐ — आद्य ब्रह्मांडीय ध्वनि। नमो — मैं प्रणाम करता हूँ, समर्पित होता हूँ। नारायणाय — नारायण को, जो सभी प्राणियों (नर) का आश्रय (अयन) हैं, सर्वव्यापी परम चेतना जो भीतर से संपूर्ण सृष्टि को धारण करती है। एकसाथ: ॐ, मैं उस सर्वव्यापी भगवान नारायण को प्रणाम करता हूँ जो सभी आत्माओं का शाश्वत विश्राम-स्थल हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
अष्टाक्षरी मंत्र के लाभ
- ·अष्टाक्षरी को वैष्णव परंपरा का सर्वोच्च मंत्र माना जाता है — केवल विष्णु की कृपा से मोक्ष प्रदान करने वाला
- ·कुंडली में कमजोर या अशुभ बृहस्पति (गुरु) और शुक्र के कारण होने वाले सभी कष्टों को दूर करता है
- ·गहरी भक्ति, समर्पण और आंतरिक शांति विकसित करता है — अहंकार के प्रतिरोध को दिव्य इच्छा में घोलता है
- ·सभी दिशाओं से सुरक्षा प्रदान करता है — नारायण की सर्वव्यापकता का अर्थ है सुरक्षा कवच में कोई अंतराल नहीं
- ·भौतिक समृद्धि, पारिवारिक सद्भाव और स्थिरता प्रदान करता है
- ·गृहस्थ जीवन जीते हुए आध्यात्मिक मुक्ति चाहने वालों के लिए अत्यंत प्रभावी — गृहस्थ वैष्णवों का मंत्र
जाप विधि
- 1.ब्रह्म मुहूर्त या सूर्यास्त पर पीले या सफेद आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठें
- 2.घी का दीपक जलाएं और तुलसी के पत्ते अर्पित करें — नारायण का सबसे प्रिय अर्पण; पीले फूल और ताजे फल भी अर्पित करें
- 3.तुलसी माला (108 तुलसी की लकड़ी के मनके) का उपयोग करें — विष्णु मंत्रों के लिए पारंपरिक और सबसे शुभ माला
- 4.कोमल, प्रवाहमान, भक्तिपूर्ण तरीके से जपें — अष्टाक्षरी स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होती है
- 5.विष्णु-नारायण का ध्यान करें — आदि शेष पर ब्रह्मांडीय महासागर में विराजमान, चरणों में लक्ष्मी, नीले-सुनहरे प्रकाश से आभामंडित
- 6.सबसे शक्तिशाली अभ्यास दिन भर मानसिक जाप है — इसे सभी गतिविधियों में एकीकृत करें
जाप का सर्वोत्तम समय
ब्रह्म मुहूर्त (4–6 बजे)। एकादशी (11वीं चंद्र तिथि — विष्णु के लिए सबसे पवित्र)। गुरुवार। कार्तिक और वैकुंठ एकादशी। विशु और वैकुंठ चतुर्दशी।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार (1 माला)। एकादशी साधना के लिए: 1008 बार। दिन भर निरंतर मानसिक जाप सर्वोच्च अभ्यास है। पुरश्चरण: 1.25 लाख।
सामान्य प्रश्न
प्र.अष्टाक्षरी (ॐ नमो नारायणाय) और द्वादशाक्षरी (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) में क्या अंतर है?
दोनों सर्वोच्च वैष्णव मंत्र हैं। अष्टाक्षरी (8 अक्षर) पुरानी है, तैत्तिरीय आरण्यक में आती है, और श्री वैष्णवों द्वारा अनुसरित पांचरात्र आगम परंपरा का प्राथमिक मंत्र है। द्वादशाक्षरी विष्णु पुराण और भागवत पुराण में आती है। श्रीमद्भागवतम में अष्टाक्षरी को वह मंत्र बताया गया है जो नारद ने ध्रुव को सिखाया था।
प्र.क्या अष्टाक्षरी मंत्र बिना दीक्षा के जपा जा सकता है?
अष्टाक्षरी सार्वभौमिक रूप से सुलभ है। श्री वैष्णव परंपरा में आचार्य से औपचारिक पंच संस्कार दीक्षा पारंपरिक मार्ग है। लेकिन स्वयं रामानुज ने सिखाया कि जो व्यक्ति सच्ची भक्ति के साथ ॐ नमो नारायणाय जपता है, उसे नारायण की कृपा मिलती है।