प्रमुख त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव
लक्ष्मी पूजा (कोजागरी)
संक्षिप्त परिचय
लक्ष्मी पूजा (कोजागरी लक्ष्मी पूजा) बंगाल में दुर्गा पूजा के तुरंत बाद आश्विन पूर्णिमा की रात मनाई जाती है और पूर्वी भारत में वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण पूजाओं में से एक है। माँ लक्ष्मी को धन, समृद्धि और सौभाग्य की दात्री के रूप में पूजा जाता है। "कोजागरी" नाम "को जागर्ति?" — "कौन जाग रहा है?" — से आता है, क्योंकि माँ लक्ष्मी रात भर जागने वालों को आशीर्वाद देने आती हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
महत्व
धन, समृद्धि और घर-परिवार की खुशहाली के लिए माँ लक्ष्मी की पूजा। पूर्णिमा की रात भर जागना उनका आशीर्वाद पाने के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
अनुष्ठान और परंपराएं
प्रवेश द्वार और पूजा कक्ष में अल्पना (चावल के पेस्ट से चित्र) बनाएं। लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। कमल, लाल गुड़हल, धूप, फल अर्पित करें। लक्ष्मी पांचाली पढ़ें। रात भर जागें। महिलाएं व्रत रखें। पड़ोसियों में प्रसाद बाँटें।
पारंपरिक व्यंजन
सामान्य प्रश्न
प्र.लक्ष्मी पूजा (कोजागरी) क्या है?
लक्ष्मी पूजा (कोजागरी लक्ष्मी पूजा) बंगाल में दुर्गा पूजा के तुरंत बाद आश्विन पूर्णिमा की रात मनाई जाती है और पूर्वी भारत में वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण पूजाओं में से एक है। माँ लक्ष्मी को धन, समृद्धि और सौभाग्य की दात्री के रूप में पूजा जाता है। "कोजाग...
प्र.लक्ष्मी पूजा (कोजागरी) का क्या महत्व है?
धन, समृद्धि और घर-परिवार की खुशहाली के लिए माँ लक्ष्मी की पूजा। पूर्णिमा की रात भर जागना उनका आशीर्वाद पाने के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
प्र.लक्ष्मी पूजा (कोजागरी) के अनुष्ठान क्या हैं?
प्रवेश द्वार और पूजा कक्ष में अल्पना (चावल के पेस्ट से चित्र) बनाएं। लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। कमल, लाल गुड़हल, धूप, फल अर्पित करें। लक्ष्मी पांचाली पढ़ें। रात भर जागें। महिलाएं व्रत रखें। पड़ोसियों में प्रसाद बाँटें।
प्र.लक्ष्मी पूजा (कोजागरी) में कौन से व्यंजन बनते हैं?
नारू (नारियल के लड्डू), मोआ, पायेश, चिड़ेर मोआ, मुड़ी, नोलेन गुड़ मिठाई, फल