मौसमी त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव
गुड़ी पड़वा
संक्षिप्त परिचय
गुड़ी पड़वा मराठी और कोंकणी हिंदू नव वर्ष है, जो चैत्र शुक्ल पक्ष के पहले दिन मनाया जाता है — कर्नाटक/आंध्र में उगादि के समान दिन। "गुड़ी" एक सजाई हुई बाँस की छड़ी होती है जिसके ऊपर उल्टा तांबे या चाँदी का बर्तन होता है, कपड़े, फूल-नीम की मालाएं और शक्कर की मिठाई की माला से सजाकर घरों के बाहर खड़ी की जाती है — विजय और सौभाग्य के प्रतीक के रूप में।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
महत्व
नव वर्ष, भगवान राम की अयोध्या वापसी और धार्मिकता की विजय का उत्सव। घरों के बाहर खड़ी गुड़ी समृद्धि की प्रतीक है, बुराई को दूर भगाती है और आने वाले वर्ष के लिए घर में सौभाग्य का आमंत्रण देती है।
अनुष्ठान और परंपराएं
सूर्योदय से पहले प्रवेश द्वार पर गुड़ी (उल्टे बर्तन वाली बाँस की छड़ी) खड़ी करें। तेल स्नान और नए कपड़े। हल्दी और कुमकुम लगाएं। नीम-गुड़ का मिश्रण बनाएं और खाएं। पूरन पोली बनाएं। पूजा करें। मंदिर जाएं।
पारंपरिक व्यंजन
सामान्य प्रश्न
प्र.गुड़ी पड़वा क्या है?
गुड़ी पड़वा मराठी और कोंकणी हिंदू नव वर्ष है, जो चैत्र शुक्ल पक्ष के पहले दिन मनाया जाता है — कर्नाटक/आंध्र में उगादि के समान दिन। "गुड़ी" एक सजाई हुई बाँस की छड़ी होती है जिसके ऊपर उल्टा तांबे या चाँदी का बर्तन होता है, कपड़े, फूल-नीम की मालाएं और श...
प्र.गुड़ी पड़वा का क्या महत्व है?
नव वर्ष, भगवान राम की अयोध्या वापसी और धार्मिकता की विजय का उत्सव। घरों के बाहर खड़ी गुड़ी समृद्धि की प्रतीक है, बुराई को दूर भगाती है और आने वाले वर्ष के लिए घर में सौभाग्य का आमंत्रण देती है।
प्र.गुड़ी पड़वा के अनुष्ठान क्या हैं?
सूर्योदय से पहले प्रवेश द्वार पर गुड़ी (उल्टे बर्तन वाली बाँस की छड़ी) खड़ी करें। तेल स्नान और नए कपड़े। हल्दी और कुमकुम लगाएं। नीम-गुड़ का मिश्रण बनाएं और खाएं। पूरन पोली बनाएं। पूजा करें। मंदिर जाएं।
प्र.गुड़ी पड़वा में कौन से व्यंजन बनते हैं?
पूरन पोळी (मीठी भरवाँ रोटी), श्रीखंड, आमटी (मसालेदार दाल), नीम-गुड़ का मिश्रण, सुंठ पाक, पोहा, साबूदाना खिचड़ी