प्रमुख त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव
दुर्गा पूजा
संक्षिप्त परिचय
दुर्गा पूजा बंगाल और पूर्वी भारत का सबसे भव्य त्योहार है, जो आश्विन मास में पाँच दिनों (षष्ठी से दशमी) तक मनाया जाता है। यह माँ दुर्गा के अपने चार बच्चों — लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश — के साथ भैंस रूपी राक्षस महिषासुर का वध करने के लिए पृथ्वी पर अवतरण का उत्सव है। देवी की विस्तृत मिट्टी की मूर्तियाँ सजे-धजे पंडालों में स्थापित की जाती हैं और विजयादशमी पर भावपूर्ण विसर्जन जुलूस के साथ मूर्तियों को नदी में विसर्जित किया जाता है।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
महत्व
दिव्य स्त्री शक्ति की बुराई पर विजय, माँ दुर्गा के घर आगमन और धर्म की अधर्म पर जीत का उत्सव। यह त्योहार बंगाल की सांस्कृतिक धड़कन है।
अनुष्ठान और परंपराएं
महाषष्ठी पर बोधन (आवाहन)। कोला बौ (केले की दुल्हन) रिवाज के साथ सप्तमी पूजा। अष्टमी पुष्पांजलि और अष्टमी-नवमी संधिकाल में संधि पूजा। नवमी हवन। विजयादशमी पर सिंदूर खेला। नदी में मूर्ति विसर्जन।
पारंपरिक व्यंजन
सामान्य प्रश्न
प्र.दुर्गा पूजा क्या है?
दुर्गा पूजा बंगाल और पूर्वी भारत का सबसे भव्य त्योहार है, जो आश्विन मास में पाँच दिनों (षष्ठी से दशमी) तक मनाया जाता है। यह माँ दुर्गा के अपने चार बच्चों — लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश — के साथ भैंस रूपी राक्षस महिषासुर का वध करने के लिए पृथ्वी ...
प्र.दुर्गा पूजा का क्या महत्व है?
दिव्य स्त्री शक्ति की बुराई पर विजय, माँ दुर्गा के घर आगमन और धर्म की अधर्म पर जीत का उत्सव। यह त्योहार बंगाल की सांस्कृतिक धड़कन है।
प्र.दुर्गा पूजा के अनुष्ठान क्या हैं?
महाषष्ठी पर बोधन (आवाहन)। कोला बौ (केले की दुल्हन) रिवाज के साथ सप्तमी पूजा। अष्टमी पुष्पांजलि और अष्टमी-नवमी संधिकाल में संधि पूजा। नवमी हवन। विजयादशमी पर सिंदूर खेला। नदी में मूर्ति विसर्जन।
प्र.दुर्गा पूजा में कौन से व्यंजन बनते हैं?
भोग खिचुड़ी, लाबड़ा तरकारी, चटनी, पायेश, संदेश, मिष्टी दोई, लुची आलूर दम