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प्रमुख त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

देव दीपावली

देवता भगवान शिव, देवी गंगा, समस्त देवता
माह कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर)
क्षेत्र वाराणसी (काशी), उत्तर प्रदेश

संक्षिप्त परिचय

देव दीपावली — शाब्दिक अर्थ "देवताओं की दीवाली" — वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा पर दीवाली के 15 दिन बाद मनाई जाती है। इस रात सभी देवता गंगा में स्नान करते हैं। यह पर्व शिव की त्रिपुरासुर पर विजय से भी जुड़ा है। वाराणसी के 84 घाट लाखों दीपकों से जगमगाते हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

देव दीपावली शिव का त्रिपुर दहन और सभी देवताओं के गंगा स्नान को चिह्नित करती है। कार्तिक पूर्णिमा सबसे पवित्र पूर्णिमा है — इस रात गंगा स्नान सभी तीर्थों के पुण्य के बराबर है।

अनुष्ठान और परंपराएं

वाराणसी के घाटों पर दीपक जलाएं और गंगा में प्रवाहित करें। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करें। दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती में भाग लें। सभी 84 घाटों की रोशनी देखें। आकाश दीप जलाएं। काशी विश्वनाथ मंदिर में शिव पूजा करें।

पारंपरिक व्यंजन

मालपुआखीरचना चाटठंडाईबनारसी पान

सामान्य प्रश्न

प्र.देव दीपावली क्या है?

देव दीपावली — शाब्दिक अर्थ "देवताओं की दीवाली" — वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा पर दीवाली के 15 दिन बाद मनाई जाती है। इस रात सभी देवता गंगा में स्नान करते हैं। यह पर्व शिव की त्रिपुरासुर पर विजय से भी जुड़ा है। वाराणसी के 84 घाट लाखों दीपकों से जगमगाते...

प्र.देव दीपावली का क्या महत्व है?

देव दीपावली शिव का त्रिपुर दहन और सभी देवताओं के गंगा स्नान को चिह्नित करती है। कार्तिक पूर्णिमा सबसे पवित्र पूर्णिमा है — इस रात गंगा स्नान सभी तीर्थों के पुण्य के बराबर है।

प्र.देव दीपावली के अनुष्ठान क्या हैं?

वाराणसी के घाटों पर दीपक जलाएं और गंगा में प्रवाहित करें। ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करें। दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती में भाग लें। सभी 84 घाटों की रोशनी देखें। आकाश दीप जलाएं। काशी विश्वनाथ मंदिर में शिव पूजा करें।

प्र.देव दीपावली में कौन से व्यंजन बनते हैं?

मालपुआ, खीर, चना चाट, ठंडाई, बनारसी पान

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