प्रमुख त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव
अन्नपूर्णा जयंती
संक्षिप्त परिचय
अन्नपूर्णा जयंती देवी अन्नपूर्णा की जन्म वर्षगांठ है — हिंदू धर्म में भोजन, पोषण और प्रचुरता की देवी, जो देवी पार्वती का ही रूप हैं। नाम का अर्थ है "अन्न से परिपूर्ण"। पौराणिक कथा के अनुसार, जब शिव ने संसार को माया बताया तो पार्वती अदृश्य हो गईं और ब्रह्मांड में अकाल आ गया; तब वे अन्नपूर्णा रूप में प्रकट हुईं और स्वयं शिव को भोजन कराया। वाराणसी (काशी) उनकी पूजा का सबसे महत्त्वपूर्ण केंद्र है।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
महत्व
भोजन को दिव्य उपहार और शरीर के पोषण को पवित्र मानता है। अन्नपूर्णा की पूजा से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। वे रसोइयों, किसानों और सभी पोषण प्रदाताओं की आराध्य देवी हैं। इस दिन दूसरों को भोजन कराना (अन्न दान) सबसे बड़ी पूजा मानी जाती है।
अनुष्ठान और परंपराएं
देवी अन्नपूर्णा की फूल, फल और पके भोजन से विशेष पूजा करें। विशेष भोजन बनाएं और पहले देवी को अर्पित करें। सामुदायिक भंडारा आयोजित करें और गरीबों व ब्राह्मणों को भोजन कराएं। चावल, अनाज और किराना दान करें। अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करें। रसोई में घी के दीपक जलाएं।
पारंपरिक व्यंजन
सामान्य प्रश्न
प्र.अन्नपूर्णा जयंती क्या है?
अन्नपूर्णा जयंती देवी अन्नपूर्णा की जन्म वर्षगांठ है — हिंदू धर्म में भोजन, पोषण और प्रचुरता की देवी, जो देवी पार्वती का ही रूप हैं। नाम का अर्थ है "अन्न से परिपूर्ण"। पौराणिक कथा के अनुसार, जब शिव ने संसार को माया बताया तो पार्वती अदृश्य हो गईं और ब...
प्र.अन्नपूर्णा जयंती का क्या महत्व है?
भोजन को दिव्य उपहार और शरीर के पोषण को पवित्र मानता है। अन्नपूर्णा की पूजा से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। वे रसोइयों, किसानों और सभी पोषण प्रदाताओं की आराध्य देवी हैं। इस दिन दूसरों को भोजन कराना (अन्न दान) सबसे बड़ी पूजा मानी जाती है।
प्र.अन्नपूर्णा जयंती के अनुष्ठान क्या हैं?
देवी अन्नपूर्णा की फूल, फल और पके भोजन से विशेष पूजा करें। विशेष भोजन बनाएं और पहले देवी को अर्पित करें। सामुदायिक भंडारा आयोजित करें और गरीबों व ब्राह्मणों को भोजन कराएं। चावल, अनाज और किराना दान करें। अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करें। रसोई में घी के दीपक जलाएं।
प्र.अन्नपूर्णा जयंती में कौन से व्यंजन बनते हैं?
खिचड़ी, पूरी-सब्जी, खीर, हलवा, दाल-चावल, पंचामृत