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सूर्य ग्रहण — वैदिक ज्योतिष

सूर्य ग्रहण 2026

2026 में सूर्य ग्रहण की तारीख, IST समय, भारत में दृश्यता, सूतक नियम और सभी 12 राशियों पर वैदिक ज्योतिष प्रभाव की संपूर्ण जानकारी।

अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक पंचांग

वलयाकार सूर्य ग्रहण — 17 फरवरी 2026

17 फरवरी 2026 का वलयाकार सूर्य ग्रहण केवल अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी सिरे से दृश्य "रिंग ऑफ फायर" बनाता है। यह कुंभ राशि में धनिष्ठा नक्षत्र में होता है। कुंभ राशि मानवतावादी कार्यों, प्रौद्योगिकी और सामाजिक सुधार को रेखांकित करती है।

तारीख

17 फरवरी 2026

समय (IST)

UTC 10:00–14:25 (IST 15:30–19:55)

प्रकार

वलयाकार

राशि

कुंभ

नक्षत्र

Dhanistha

अवधि

4 hours 25 minutes

दृश्यता

अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी सिरे में दृश्य। भारत में दृश्य नहीं।

वैदिक महत्व

कुंभ राशि में वलयाकार ग्रहण (धनिष्ठा, मंगल-शासित)। शनि कुंभ का सह-स्वामी है। विषय: सामाजिक न्याय, प्रौद्योगिकी रूपांतरण और मानवतावादी कार्य। अगले 6 महीने सामूहिक सामाजिक संरचनाओं में बदलाव लाते हैं।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

करें

  • शनि मंत्र करें — "ॐ शनैश्चराय नमः" (शनि कुंभ का स्वामी)
  • मानवतावादी सेवा और सामुदायिक कार्य करें
  • सामूहिक उपचार और सामाजिक रूपांतरण पर ध्यान करें
  • दान कार्य करें, विशेष रूप से गरीबों के लिए
  • सामूहिक में अपनी भूमिका पर विचार करें
  • ग्रहण काल में उपवास और आध्यात्मिक साधना करें

न करें

  • अहंकार या व्यक्तिगत लाभ के आधार पर निर्णय न लें
  • ग्रहण के दौरान सामाजिक संघर्ष और समूह विवाद से बचें
  • ग्रहण विंडो में नई प्रौद्योगिकी परियोजनाएं शुरू न करें
  • ग्रहण काल में भोजन छोड़ें (सूतक लागू)
  • नकारात्मक मीडिया और भय-आधारित सोच से बचें
  • ग्रहण के दौरान बड़े वित्तीय निर्णय न लें

सभी 12 राशियों पर प्रभाव

मेष राशि के 11वें भाव में — सामाजिक नेटवर्क और दीर्घकालीन लक्ष्य बदलते हैं।

वृष राशि के 10वें भाव में — करियर और सार्वजनिक प्रतिष्ठा में बड़े बदलाव।

मिथुन राशि के 9वें भाव में — मान्यताएं और उच्च शिक्षा रूपांतरित।

कर्क राशि के 8वें भाव में — रूपांतरण और मनोवैज्ञानिक गहराई उजागर।

सिंह राशि के 7वें भाव पर — साझेदारी और विवाह निर्णायक मोड़ पर।

कन्या राशि के 6वें भाव में — स्वास्थ्य और सेवा दिनचर्या रूपांतरित।

तुला राशि के 5वें भाव में — रचनात्मकता और प्रेम उजागर।

वृश्चिक (Scorpio)

2026 ग्रहण गाइड →

वृश्चिक राशि के 4थे भाव में — घर और परिवार में बड़े बदलाव।

धनु राशि के 3रे भाव में — संचार और भाई-बहन रूपांतरित।

मकर राशि के 2रे भाव में — वित्तीय आधार बदलते हैं।

कुंभ राशि के 1ले भाव में — व्यक्तिगत पहचान और जीवन दिशा का नवीनीकरण।

मीन राशि के 12वें भाव में — आध्यात्मिक साधना और कर्मिक चक्र पूरा होता है।

पूर्ण सूर्य ग्रहण — 12 अगस्त 2026

12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण दशक के सबसे शानदार ग्रहणों में से एक है, जिसमें पूर्णता स्पेन और यूरोप के कुछ हिस्सों से गुजरती है। यह कर्क राशि में आश्लेषा नक्षत्र में होता है। कर्क राशि घर, परिवार, माता और राष्ट्रीय पहचान को उजागर करती है।

तारीख

12 अगस्त 2026

समय (IST)

UTC 16:00–19:54 (IST 21:30–01:24+1)

प्रकार

पूर्ण

राशि

कर्क

नक्षत्र

Ashlesha

अवधि

2 minutes 18 seconds of totality

दृश्यता

आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस में पूर्ण। अधिकांश यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में आंशिक। भारत में सीधे दृश्य नहीं।

वैदिक महत्व

कर्क राशि में पूर्ण सूर्य ग्रहण (आश्लेषा, बुध-शासित)। चंद्रमा कर्क का स्वामी है। विषय: भावनात्मक रूपांतरण, घर सुरक्षा और पारिवारिक विरासत। कर्क में केतु इस ग्रहण के साथ युति करके घर और परिवार के कर्म के पूर्णता का संकेत देता है।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

करें

  • चंद्र मंत्र करें — "ॐ चंद्रमसे नमः" (चंद्रमा कर्क का स्वामी)
  • माता का सम्मान करें — माँ को फोन या मिलने जाएं, या दिवंगत माताओं के लिए प्रार्थना करें
  • भावनात्मक मुक्ति और पारिवारिक उपचार पर ध्यान करें
  • भोजन दान करें — विशेष रूप से पकाया चावल, दूध और सफेद वस्तुएं
  • ग्रहण से पहले और बाद में स्नान करें
  • घर की शुद्धि करें

न करें

  • ग्रहण के दौरान अचल संपत्ति लेनदेन और संपत्ति निर्णय से बचें
  • ग्रहण के दौरान पारिवारिक विवाद और भावनात्मक टकराव से बचें
  • सूतक काल में भोजन छोड़ें
  • नए घरेलू प्रोजेक्ट शुरू न करें
  • गर्भवती महिलाएं ग्रहण के दौरान घर के अंदर रहें
  • ग्रहण काल में केवल भावना के आधार पर निर्णय न लें

सभी 12 राशियों पर प्रभाव

मेष राशि के 4थे भाव में — घर, परिवार और माता ग्रहण के केंद्र में।

वृष राशि के 3रे भाव में — संचार और भाई-बहन रूपांतरित।

मिथुन राशि के 2रे भाव में — वित्तीय आधार और पारिवारिक धन बदलते हैं।

कर्क राशि के 1ले भाव में — सबसे शक्तिशाली स्थान। असाधारण पहचान नवीनीकरण।

सिंह राशि के 12वें भाव में — आध्यात्मिक साधना और पुराना कर्म उजागर।

कन्या राशि के 11वें भाव में — सामाजिक नेटवर्क और लाभ रूपांतरित।

तुला राशि के 10वें भाव में — करियर में बड़े बदलाव।

वृश्चिक (Scorpio)

2026 ग्रहण गाइड →

वृश्चिक राशि के 9वें भाव में — मान्यताएं और आध्यात्मिक गुरु बदलते हैं।

धनु राशि के 8वें भाव में — गहरा रूपांतरण और विरासत मामले।

मकर राशि के 7वें भाव में — साझेदारी और विवाह निर्णायक मोड़ पर।

कुंभ राशि के 6वें भाव में — स्वास्थ्य और सेवा दिनचर्या रूपांतरित।

मीन राशि के 5वें भाव में — रचनात्मकता और प्रेम उजागर।

FAQ — सूर्य ग्रहण 2026

प्र.2026 में सूर्य ग्रहण कब है?

2026 में 2 सूर्य ग्रहण हैं: 17 फरवरी 2026 और 12 अगस्त 2026।

प्र.2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा क्या?

17 फरवरी 2026: अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी सिरे में दृश्य। भारत में दृश्य नहीं। 12 अगस्त 2026: आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस में पूर्ण। अधिकांश यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में आंशिक। भारत में सीधे दृश्य नहीं।

प्र.सूर्य ग्रहण में कौन सा मंत्र जपें?

सूर्य ग्रहण के दौरान गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या सूर्य बीज मंत्र (ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः) का जाप करें।

प्र.सूर्य ग्रहण में खाना खा सकते हैं?

वैदिक परंपरा के अनुसार ग्रहण के दौरान उपवास रखना चाहिए। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके भोजन करें।

प्र.सूतक काल क्या है?

सूर्य ग्रहण में सूतक ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है। इस दौरान शुभ कार्य, भोजन बनाना और पूजा से परहेज करें।