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सूर्य ग्रहण — वैदिक ज्योतिष

सूर्य ग्रहण 2025

2025 में सूर्य ग्रहण की तारीख, IST समय, भारत में दृश्यता, सूतक नियम और सभी 12 राशियों पर वैदिक ज्योतिष प्रभाव की संपूर्ण जानकारी।

अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक पंचांग

आंशिक सूर्य ग्रहण — 29 मार्च 2025

29 मार्च 2025 का सूर्य ग्रहण एक आंशिक सूर्य ग्रहण है जो उत्तर-पश्चिम यूरोप और उत्तर-पूर्व अटलांटिक में दृश्य है। ग्रीनलैंड और आइसलैंड पर अधिकतम ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के 93% को ढकता है। वैदिक ज्योतिष में यह मीन राशि का ग्रहण समाप्ति, मुक्ति और अवचेतन मन के 12वें भाव के विषयों को सक्रिय करता है।

तारीख

29 मार्च 2025

समय (IST)

UTC 09:48–14:01 (IST 15:18–19:31)

प्रकार

आंशिक

राशि

मीन

नक्षत्र

Uttara Bhadrapada

अवधि

4 hours 13 minutes

दृश्यता

उत्तर-पश्चिम यूरोप, उत्तर-पूर्व उत्तरी अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका, ग्रीनलैंड। भारत में दृश्य नहीं।

वैदिक महत्व

यह ग्रहण उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में मीन राशि में होता है — जो शनि द्वारा शासित है। बृहस्पति मीन का सह-स्वामी है। विषय: आध्यात्मिक विघटन, कर्मिक समापन, मुक्ति की ओर ले जाने वाले अंत। इस ग्रहण के बाद 6 महीने मीन और कन्या जातकों के लिए परिवर्तन लाते हैं, विशेष रूप से स्वास्थ्य, दैनिक दिनचर्या और सेवा क्षेत्रों में।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

करें

  • ग्रहण काल में ध्यान और आत्म-चिंतन करें
  • गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या सूर्य बीज मंत्र का जाप करें
  • स्वास्थ्य अनुमति दे तो ग्रहण के दौरान उपवास रखें
  • ग्रहण से पहले या बाद में भोजन, वस्त्र या धन का दान करें
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें
  • ग्रहण के बाद नए आरंभ के लिए संकल्प लें

न करें

  • ग्रहण के दौरान नया कार्य, अनुबंध हस्ताक्षर या बड़े निर्णय न लें
  • ग्रहण के दौरान भोजन से बचें (आंशिक उपवास अनुशंसित)
  • प्रमाणित ग्रहण चश्मे के बिना सूर्य ग्रहण सीधे न देखें
  • गर्भवती महिलाएं ग्रहण काल में बाहर जाने से बचें
  • ग्रहण के दौरान नई दवाएं शुरू न करें या शल्य चिकित्सा न करवाएं
  • ग्रहण विंडो के दौरान यात्रा से बचें

सभी 12 राशियों पर प्रभाव

मेष राशि के लिए यह ग्रहण 12वें भाव को सक्रिय करता है। एकांत, आध्यात्मिक साधना और विदेश यात्रा के विषय उभरते हैं। पुराना कर्म सामने आता है।

वृष राशि के लिए यह ग्रहण 11वें भाव में पड़ता है। सामाजिक नेटवर्क बदलते हैं, दीर्घकालीन लक्ष्य रूपांतरित होते हैं।

मिथुन राशि के 10वें भाव (करियर) को यह ग्रहण प्रभावित करता है। पेशे और सार्वजनिक छवि में बड़े बदलाव आते हैं।

कर्क राशि के 9वें भाव (धर्म, उच्च शिक्षा) को सक्रिय करता है। मान्यताएं और दर्शन गहरे बदलाव से गुजरते हैं।

सिंह राशि के 8वें भाव में ग्रहण — रूपांतरण, विरासत और गुप्त वित्त उजागर होते हैं। मनोवैज्ञानिक परिवर्तन आमंत्रित है।

कन्या राशि पर प्रत्यक्ष ग्रहण प्रभाव — 7वें भाव (साझेदारी) सक्रिय। विवाह और व्यापार साझेदारी निर्णायक मोड़ पर।

तुला राशि के 6वें भाव (स्वास्थ्य, कार्य) को सक्रिय करता है। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। कार्य गतिशीलता बदलती है।

वृश्चिक (Scorpio)

2025 ग्रहण गाइड →

वृश्चिक राशि के 5वें भाव (रचनात्मकता, संतान) को प्रकाशित करता है। रचनात्मक परियोजना शुरू या पूरी होती है।

धनु राशि के 4वें भाव (घर, परिवार) को सक्रिय करता है। घरेलू स्थानांतरण और संपत्ति निर्णय हावी होते हैं।

मकर राशि के 3रे भाव (संचार, भाई-बहन) को उजागर करता है। लेखन और मीडिया के अवसर उभरते हैं।

कुंभ राशि के 2रे भाव (धन, वाणी) में पड़ता है। आर्थिक मामले पुनः कैलिब्रेट होते हैं।

मीन राशि के 1ले भाव में — व्यक्तिगत पहचान और दिशा में गहरा नवीनीकरण होता है।

आंशिक सूर्य ग्रहण — 21 सितंबर 2025

21 सितंबर 2025 का आंशिक सूर्य ग्रहण केवल दक्षिणी गोलार्ध में दृश्य है। यह कन्या राशि में उत्तर आषाढ़ नक्षत्र में होता है। भारत में दृश्य न होने के बाद भी इसके वैदिक प्रभाव सार्वभौमिक रूप से लागू होते हैं।

तारीख

21 सितंबर 2025

समय (IST)

UTC 17:57–21:13 (IST 23:27–02:43+1)

प्रकार

आंशिक

राशि

कन्या

नक्षत्र

Uttara Ashadha

अवधि

3 hours 16 minutes

दृश्यता

ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण प्रशांत और अंटार्कटिका में दृश्य। भारत में दृश्य नहीं।

वैदिक महत्व

2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण, फिर से कन्या-मीन अक्ष में। उत्तर आषाढ़ सूर्य द्वारा शासित है, जो नेतृत्व और जीवन उद्देश्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य परिवर्तन और करियर पुनः कैलिब्रेशन के लिए 6-माह की खिड़की।

ग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें

करें

  • सूर्य मंत्र जाप करें — "ॐ सूर्याय नमः" या आदित्य हृदयम
  • जीवन में उद्देश्य और दिशा की स्पष्टता पर ध्यान करें
  • गेहूं, तांबा या केसर — सूर्य से जुड़ी वस्तुएं दान करें
  • दान-पुण्य और सेवा कार्य करें
  • स्वास्थ्य अनुमति दे तो ग्रहण काल में उपवास रखें
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद सूर्योदय पर स्नान करें

न करें

  • प्रमाणित सौर दर्शन चश्मे के बिना ग्रहण न देखें
  • ग्रहण के दौरान बड़े नए कार्य या अनुबंध से बचें
  • ग्रहण काल में भोजन छोड़ें (सूतक पालन करें)
  • गर्भवती महिलाएं ग्रहण से बचें
  • ग्रहण के दौरान शल्य चिकित्सा और चिकित्सा निर्णय से बचें
  • ग्रहण विंडो में अनावश्यक यात्रा न करें

सभी 12 राशियों पर प्रभाव

मेष राशि के 6वें भाव में — स्वास्थ्य और कार्य सेवा दूसरी बार सक्रिय।

वृष राशि के 5वें भाव में — रचनात्मकता का दूसरा निर्णायक मोड़।

मिथुन राशि के 4थे भाव में — पारिवारिक मामला अंतिम समाधान तक पहुँचता है।

कर्क राशि के 3रे भाव में — संचार परियोजना या भाई-बहन का मुद्दा समाप्त होता है।

सिंह राशि के 2रे भाव में — वित्तीय पुनर्गठन महत्वपूर्ण मील के पत्थर पर।

कन्या राशि के 1ले भाव में — असाधारण पहचान नवीनीकरण। स्वास्थ्य और दिशा रूपांतरित।

तुला राशि के 12वें भाव में — नए चक्र से पहले अंतिम समाधान।

वृश्चिक (Scorpio)

2025 ग्रहण गाइड →

वृश्चिक राशि के 11वें भाव में — सामाजिक नेटवर्क परिवर्तन जारी।

धनु राशि के 10वें भाव में — एक बड़ा करियर अध्याय बंद होता है।

मकर राशि के 9वें भाव में — मान्यता प्रणाली पूरी तरह पुनर्विचार की जाती है।

कुंभ राशि के 8वें भाव में — गहरा मनोवैज्ञानिक रूपांतरण जारी।

मीन राशि के 7वें भाव पर — साझेदारी रूपांतरण पूरा होता है।

FAQ — सूर्य ग्रहण 2025

प्र.2025 में सूर्य ग्रहण कब है?

2025 में 2 सूर्य ग्रहण हैं: 29 मार्च 2025 और 21 सितंबर 2025।

प्र.2025 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा क्या?

29 मार्च 2025: उत्तर-पश्चिम यूरोप, उत्तर-पूर्व उत्तरी अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका, ग्रीनलैंड। भारत में दृश्य नहीं। 21 सितंबर 2025: ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण प्रशांत और अंटार्कटिका में दृश्य। भारत में दृश्य नहीं।

प्र.सूर्य ग्रहण में कौन सा मंत्र जपें?

सूर्य ग्रहण के दौरान गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या सूर्य बीज मंत्र (ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः) का जाप करें।

प्र.सूर्य ग्रहण में खाना खा सकते हैं?

वैदिक परंपरा के अनुसार ग्रहण के दौरान उपवास रखना चाहिए। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके भोजन करें।

प्र.सूतक काल क्या है?

सूर्य ग्रहण में सूतक ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है। इस दौरान शुभ कार्य, भोजन बनाना और पूजा से परहेज करें।