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वास्तु दहलीज़: पवित्र महत्व, अनुष्ठान और नियम

संक्षिप्त उत्तर

दरवाज़े की दहलीज़ (देहरी) वास्तु में पवित्र है — यह बाहरी और आंतरिक दुनिया के बीच की सीमा है। इस पर कभी खड़े न हों। कुमकुम या रंगोली लगाएँ और साफ रखें।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वास्तु शास्त्र परंपरा

## वास्तु दहलीज़

मुख्य दरवाज़े की दहलीज़ (देहरी) भारतीय वास्तु और सांस्कृतिक परंपरा में गहरा महत्व रखती है।

### दहलीज़ पवित्र क्यों है

- दहलीज़ **गृह लक्ष्मी** (घर की समृद्धि ऊर्जा) और बाहरी दुनिया के बीच की सीमा है। - यह **देवी लक्ष्मी** का स्थान मानी जाती है।

### मुख्य नियम

- दहलीज़ पर कभी **खड़े न हों**। - दहलीज़ पर कभी **न बैठें**।

### अनुष्ठान

- **कुमकुम**: हर सुबह कुमकुम का तिलक लगाएँ। - **रंगोली**: दहलीज़ पर रंगोली बनाएँ। - **हल्दी पानी**: हल्दी के पानी से पोंछें। - **दीया**: सूर्यास्त के समय दीया जलाएँ।

मुख्य वास्तु टिप्स

  • दहलीज़ पर कभी खड़े या बैठें नहीं।
  • हर सुबह कुमकुम या तिलक लगाएँ।
  • दहलीज़ पर रंगोली बनाएँ।
  • साप्ताहिक हल्दी पानी से पोंछें।
  • सूर्यास्त के समय दीया जलाएँ।
  • दहलीज़ साफ, दरारमुक्त रखें और अव्यवस्था न रखें।

FAQ — दरवाज़े की दहलीज़ के लिए वास्तु: महत्व और अनुष्ठान

प्र.वास्तु में दहलीज़ पर खड़े क्यों नहीं होना चाहिए?

दहलीज़ देवी लक्ष्मी का स्थान है। इस पर खड़े होना इस पवित्र ऊर्जा का अनादर है।

प्र.दहलीज़ पर कुमकुम लगाने का क्या महत्व है?

कुमकुम दहलीज़ पर लक्ष्मी ऊर्जा को सक्रिय करता है और समृद्धि आमंत्रित करता है।

प्र.दहलीज़ पर रंगोली क्यों बनाते हैं?

रंगोली सकारात्मक ऊर्जा और शुभ आगंतुकों को आमंत्रित करती है।

प्र.यदि दहलीज़ दरारदार हो तो क्या होता है?

घर की ऊर्जा सीमा में विघ्न होता है — तुरंत मरम्मत करें।

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