भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी और अग्नि देव — पूजा विधि
विवाह पूजा विधि
विवाह पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में विवाह पूजा करने की सही वैदिक विधि।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
विवाह पूजा — चरण दर चरण विधि
- 1
गणेश पूजा और नवग्रह पूजा से आरंभ करें।
- 2
कन्यादान — वधू के पिता वर के हाथ में कन्या का हाथ देते हैं।
- 3
वरमाला का आदान-प्रदान करें।
- 4
ग्रंथि बंधन (पवित्र गांठ) बांधें।
- 5
सप्तपदी — सात वचनों के साथ पवित्र अग्नि के चारों ओर सात फेरे लें।
- 6
सिंदूरदान और मंगलसूत्र पहनाएं।
- 7
बुजुर्गों के आशीर्वाद और पूर्णाहुति से समापन करें।
विवाह पूजा के महत्वपूर्ण नियम
• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।
• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।
• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।
• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।
विवाह पूजा के लाभ
विवाह को दैवीय आशीर्वाद से पवित्र करता है, वैवाहिक सद्भाव और आजीवन साथ सुनिश्चित करता है, समृद्धि और संतान की कामना पूरी होती है, पारिवारिक और सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं।
FAQ — विवाह पूजा विधि
प्र.क्या विवाह पूजा घर पर की जा सकती है?
हाँ, विवाह पूजा घर पर की जा सकती है।
प्र.विवाह पूजा में कितना समय लगता है?
विवाह पूजा में सामान्यतः 3–5 घंटे का समय लगता है।
प्र.क्या विवाह पूजा के लिए पंडित जरूरी है?
विवाह पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।
प्र.विवाह पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
दोनों कुंडलियों के आधार पर वैदिक ज्योतिषी द्वारा निर्धारित शुभ मुहूर्त। पसंदीदा माह: माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ। अधिक मास और पितृ पक्ष से बचें।