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भगवान विश्वकर्मा — पूजा विधि

विश्वकर्मा पूजा विधि

विश्वकर्मा पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में विश्वकर्मा पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवताभगवान विश्वकर्मा
अवधि1–2 घंटे
शुभ समयविश्वकर्मा जयंती — 17 सितंबर (कन्या संक्रांति) या भाद्र माह का अंतिम दिन। प्रतिवर्ष कारखानों और कार्यालयों में कार्य समय के दौरान मनाई जाती है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

विश्वकर्मा पूजा — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    कार्यस्थल पर सभी औजार और मशीनें साफ करके सजाएं

  2. 2

    भगवान विश्वकर्मा की छवि के साथ पूजा वेदी स्थापित करें

  3. 3

    फूल, फल और मिठाई अर्पित करें

  4. 4

    विश्वकर्मा स्तोत्र पढ़ें और आरती करें

  5. 5

    पूजा पूरी होने तक औजारों का उपयोग न करें

  6. 6

    सभी श्रमिकों में प्रसाद वितरित करें।

विश्वकर्मा पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

विश्वकर्मा पूजा के लाभ

कारीगरों को उत्पादकता और कौशल मिलता है, कार्यस्थल दुर्घटनाओं से सुरक्षा होती है, व्यवसायों को विकास का आशीर्वाद मिलता है, पेशेवर बाधाएं दूर होती हैं और रचनात्मकता के लिए दिव्य प्रेरणा मिलती है।

FAQ — विश्वकर्मा पूजा विधि

प्र.क्या विश्वकर्मा पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, विश्वकर्मा पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.विश्वकर्मा पूजा में कितना समय लगता है?

विश्वकर्मा पूजा में सामान्यतः 1–2 घंटे का समय लगता है।

प्र.क्या विश्वकर्मा पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

विश्वकर्मा पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.विश्वकर्मा पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

विश्वकर्मा जयंती — 17 सितंबर (कन्या संक्रांति) या भाद्र माह का अंतिम दिन। प्रतिवर्ष कारखानों और कार्यालयों में कार्य समय के दौरान मनाई जाती है।