आज: वैदिक ज्योतिष · प्राचीन · सटीक · मुफ्त
खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIसोमवार, 20 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
VedicBirth
वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना
Aaj: Vedic Astrology & Jyotish · Free · Precise
Vol. I · No. 1 · Est. MMXXVIMonday, 20 April 2026Free · Vedic · Precise
VedicBirth
Vedic Astrology & Jyotish Calculations
8,241Kundlis Generated
50+Free Tools
27Nakshatras
12Rashis Decoded
100%Free Forever

वास्तु पुरुष, भगवान गणेश, नवग्रह — पूजा विधि

वास्तु शांति पूजा विधि

वास्तु शांति पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में वास्तु शांति पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवतावास्तु पुरुष, भगवान गणेश, नवग्रह
अवधि4–6 घंटे
शुभ समयनए घर में प्रवेश से पहले

अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

वास्तु शांति पूजा — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    गंगाजल से घर को शुद्ध करें

  2. 2

    गणेश पूजा करें

  3. 3

    घर के केंद्र में वास्तु पुरुष का आवाहन करें

  4. 4

    नवग्रह पूजा करें

  5. 5

    वास्तु मंत्रों से हवन करें

  6. 6

    उत्तर-पूर्व दिशा में वास्तु यंत्र स्थापित करें

  7. 7

    प्रसाद बांटें।

वास्तु शांति पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

वास्तु शांति पूजा के लाभ

वास्तु दोष दूर होते हैं, घर में शांति और सामंजस्य आता है, निवासियों का स्वास्थ्य सुधरता है, नकारात्मक ऊर्जाएं हटती हैं, परिवार के सभी सदस्यों की समृद्धि होती है।

FAQ — वास्तु शांति पूजा विधि

प्र.क्या वास्तु शांति पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, वास्तु शांति पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.वास्तु शांति पूजा में कितना समय लगता है?

वास्तु शांति पूजा में सामान्यतः 4–6 घंटे का समय लगता है।

प्र.क्या वास्तु शांति पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

वास्तु शांति पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.वास्तु शांति पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

नए घर में प्रवेश से पहले, नवीनीकरण के बाद, या जब निवासियों को बार-बार दुर्भाग्य हो। शुभ मुहूर्त पर करें।