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देवी त्रिपुर सुंदरी (षोडशी / ललिता) — पूजा विधि

त्रिपुर सुंदरी पूजा विधि

त्रिपुर सुंदरी पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में त्रिपुर सुंदरी पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवतादेवी त्रिपुर सुंदरी (षोडशी / ललिता)
अवधि2–4 घंटे (सामान्य); श्री विद्या दीक्षा हेतु 16 दिवसीय षोडशी साधना
शुभ समयशुक्ल पक्ष की नवमी

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

त्रिपुर सुंदरी पूजा — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    लाल कपड़े पर श्री यंत्र (श्री चक्र) स्थापित करें

  2. 2

    पंचामृत और गुलाब जल से स्थान शुद्ध करें

  3. 3

    पूर्व दिशा में बैठें

  4. 4

    गणेश वंदना के बाद नवार्ण मंत्र से देवी का आवाहन करें

  5. 5

    षोडशोपचार (16 उपचार) अर्पित करें — आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, प्रदक्षिणा

  6. 6

    ललिता सहस्रनाम का सम्पूर्ण पाठ करें

  7. 7

    लाल फूल (गुलाब, लाल कमल), लाल मिठाई और शहद चढ़ाएं

  8. 8

    ललिता आरती और खड्गमाला स्तोत्र से समापन करें।

त्रिपुर सुंदरी पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

त्रिपुर सुंदरी पूजा के लाभ

परम सौंदर्य, आकर्षण और चुंबकीय व्यक्तित्व प्राप्त होता है, भोग और मोक्ष दोनों एक साथ प्राप्त होते हैं, श्री विद्या दीक्षा और ध्यान की उच्चतम अवस्थाएं सुलभ होती हैं, विवाह और संबंधों में सामंजस्य आता है, जीवन के श्रेष्ठतम अनुभव और समृद्धि प्राप्त होती है।

FAQ — त्रिपुर सुंदरी पूजा विधि

प्र.क्या त्रिपुर सुंदरी पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, त्रिपुर सुंदरी पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.त्रिपुर सुंदरी पूजा में कितना समय लगता है?

त्रिपुर सुंदरी पूजा में सामान्यतः 2–4 घंटे (सामान्य); श्री विद्या दीक्षा हेतु 16 दिवसीय षोडशी साधना का समय लगता है।

प्र.क्या त्रिपुर सुंदरी पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

त्रिपुर सुंदरी पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.त्रिपुर सुंदरी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

शुक्ल पक्ष की नवमी, शुक्रवार, दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय), ललिता जयंती। शुक्ल पूर्णिमा को गोधूलि वेला में की गई पूजा परम शुभकारी मानी जाती है।