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सूर्य देव + पीताम्बरा देवी — पूजा विधि

सूर्य ग्रहण पूजा विधि

सूर्य ग्रहण पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में सूर्य ग्रहण पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवतासूर्य देव + पीताम्बरा देवी
अवधिसंपूर्ण ग्रहण दिवस (सूतक से मोक्षोत्तर स्नान-दान तक)
शुभ समययह पूजा विशेष रूप से सूर्य ग्रहण के दिन ही की जाती है। मंत्र जाप के लिए ग्रहण मध्य सबसे शक्तिशाली क्षण होता है

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

सूर्य ग्रहण पूजा — चरण दर चरण विधि

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    ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक का पालन करें: पूर्ण उपवास रखें, भोजन न पकाएं, यथासंभव मौन रहें और सभी संग्रहीत खाद्य-जल में तुलसी के पत्ते रखें

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    ग्रहण के आरंभ से पीताम्बरा पाठ (बगलामुखी स्तोत्र) या सूर्य मंत्र का जाप करें — "ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः"

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    मोक्ष के क्षण पर — जब ग्रहण समाप्त हो और सूर्य पूर्णतः मुक्त हो जाए — पवित्र स्नान करें

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    आदर्श रूप से नदी या पवित्र कुंड पर; अन्यथा घर पर गंगाजल मिश्रित जल से सूर्याष्टकम का जाप करते हुए स्नान करें

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    स्नान के बाद सूर्य मंत्रों के साथ सूर्य को अर्घ्य दें

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    मोक्ष के तुरंत बाद किसी ब्राह्मण या गरीब को अन्न, तिल, तांबे का पात्र, लाल वस्त्र और गुड़ का दान करें।

सूर्य ग्रहण पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

सूर्य ग्रहण पूजा के लाभ

सूर्य ग्रहण पूजा इस ब्रह्मांडीय रूप से संवेदनशील अवधि में राहु और केतु के दुष्प्रभावों से भक्त की रक्षा करती है। प्रयागराज संगम जैसे पवित्र संगम स्थलों पर सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान सामान्य तीर्थयात्रा से लाखों गुना अधिक पुण्यदायी माना जाता है। ग्रहण काल में अन्न, वस्त्र और स्वर्ण का दान कर्मिक लाभ को कई गुना बढ़ा देता है। पीताम्बरा पाठ शत्रुओं, कानूनी बाधाओं और ग्रह-दोषों को दूर करने में सहायक है। राहु या केतु महादशा में जन्मे जातकों को इस पूजा से विशेष लाभ मिलता है।

FAQ — सूर्य ग्रहण पूजा विधि

प्र.क्या सूर्य ग्रहण पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, सूर्य ग्रहण पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.सूर्य ग्रहण पूजा में कितना समय लगता है?

सूर्य ग्रहण पूजा में सामान्यतः संपूर्ण ग्रहण दिवस (सूतक से मोक्षोत्तर स्नान-दान तक) का समय लगता है।

प्र.क्या सूर्य ग्रहण पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

सूर्य ग्रहण पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.सूर्य ग्रहण पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

यह पूजा विशेष रूप से सूर्य ग्रहण के दिन ही की जाती है। मंत्र जाप के लिए ग्रहण मध्य सबसे शक्तिशाली क्षण होता है, और पवित्र स्नान एवं दान के लिए मोक्ष का समय। भारत में दृश्यमान सूर्य ग्रहण — विशेष रूप से अश्विन, कार्तिक या चैत्र अमावस्या के दौरान — प्रयागराज संगम, हरिद्वार, वाराणसी, कुरुक्षेत्र और नासिक त्र्यंबकेश्वर में लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं।