माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु, पूजा विधि
सीमन्तोन्नयन संस्कार विधि
सीमन्तोन्नयन संस्कार की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में सीमन्तोन्नयन संस्कार करने की सही वैदिक विधि।
अंतिम अपडेट: 12 अगस्त 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
सीमन्तोन्नयन संस्कार, चरण दर चरण विधि
- 1
गर्भावस्था के 7वें या 8वें माह में शुभ दिन पर करें।
- 2
विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमाओं के साथ वेदी स्थापित करें।
- 3
पति गृह्यसूत्रों के सीमन्तोन्नयन मंत्र पढ़ते हुए साही की सुई या उदुम्बर की शाखा से तीन बार पत्नी की मांग भरें।
- 4
फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
- 5
परिवार के सदस्य होने वाली माँ को आशीर्वाद दें।
- 6
आरती और भोज से समाप्त करें।
सीमन्तोन्नयन संस्कार के महत्वपूर्ण नियम
• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।
• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।
• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।
• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।
सीमन्तोन्नयन संस्कार के लाभ
अजन्मे शिशु की नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा होती है, शिशु का शारीरिक और मानसिक विकास स्वस्थ रहता है, माता शांत रहती है और गर्भावस्था की चिंता कम होती है, सुरक्षित प्रसव के लिए दिव्य आशीर्वाद मिलता है।
FAQ, सीमन्तोन्नयन संस्कार विधि
प्र.क्या सीमन्तोन्नयन संस्कार घर पर की जा सकती है?
हाँ, सीमन्तोन्नयन संस्कार घर पर की जा सकती है।
प्र.सीमन्तोन्नयन संस्कार में कितना समय लगता है?
सीमन्तोन्नयन संस्कार में सामान्यतः 2–3 घंटे का समय लगता है।
प्र.क्या सीमन्तोन्नयन संस्कार के लिए पंडित जरूरी है?
सीमन्तोन्नयन संस्कार परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।
प्र.सीमन्तोन्नयन संस्कार का सबसे अच्छा समय क्या है?
गर्भावस्था के सातवें या आठवें महीने में शुभ तिथि को। अमावस्या और अशुभ नक्षत्रों से बचें। सूर्योदय के बाद सुबह के समय सर्वोत्तम।