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खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
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भगवान विष्णु और इंद्र देव (दैवीय रक्षा) — पूजा विधि

रक्षा बंधन पूजा विधि

रक्षा बंधन पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में रक्षा बंधन पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवताभगवान विष्णु और इंद्र देव (दैवीय रक्षा)
अवधि30–45 मिनट
शुभ समयश्रावण पूर्णिमा (जुलाई-अगस्त)। पूजा पूर्णिमा के दिन अपराह्न या प्रदोष मुहूर्त में करनी चाहिए। भद्रा काल से बचना चाहिए — शुभ मुहूर्त के लिए पंचांग देखें।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

रक्षा बंधन पूजा — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    रक्षा बंधन की सुबह बहन स्नान करके पूजा की थाली सजाए

  2. 2

    थाली में राखी, जला हुआ दीपक, कुमकुम, अक्षत, मिठाई और सूखा नारियल रखें

  3. 3

    भाई पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके बैठे

  4. 4

    बहन माथे पर कुमकुम का तिलक लगाए, अक्षत रखे, दीपक से तीन बार आरती करे, फिर मंत्र पढ़ते हुए दाहिनी कलाई पर राखी बाँधे

  5. 5

    भाई उपहार और रक्षा का वचन दे

  6. 6

    बड़ों का आशीर्वाद लेकर मिठाई बाँटकर समारोह पूर्ण करें।

रक्षा बंधन पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

रक्षा बंधन पूजा के लाभ

भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के बंधन को मजबूत करता है, भाई की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सफलता के लिए दैवीय आशीर्वाद प्राप्त होता है, बहन की प्रार्थनाएं साल भर भाई के चारों ओर एक सुरक्षा कवच का काम करती हैं और पारिवारिक प्रेम एवं दायित्व के पवित्र बंधन का नवीनीकरण होता है।

FAQ — रक्षा बंधन पूजा विधि

प्र.क्या रक्षा बंधन पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, रक्षा बंधन पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.रक्षा बंधन पूजा में कितना समय लगता है?

रक्षा बंधन पूजा में सामान्यतः 30–45 मिनट का समय लगता है।

प्र.क्या रक्षा बंधन पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

रक्षा बंधन पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.रक्षा बंधन पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

श्रावण पूर्णिमा (जुलाई-अगस्त)। पूजा पूर्णिमा के दिन अपराह्न या प्रदोष मुहूर्त में करनी चाहिए। भद्रा काल से बचना चाहिए — शुभ मुहूर्त के लिए पंचांग देखें।