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खंड १ · अंक १ · स्था. MMXXVIशुक्रवार, 24 अप्रैल 2026मुफ्त · वैदिक · सटीक
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भगवान गणेश, देवी लक्ष्मी एवं कुबेर देव — पूजा विधि

नया व्यापार पूजा विधि

नया व्यापार पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में नया व्यापार पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवताभगवान गणेश, देवी लक्ष्मी एवं कुबेर देव
अवधि2–3 घंटे
शुभ समयशुभ दिन: अक्षय तृतीया

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

नया व्यापार पूजा — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    शुभ मुहूर्त चुनें (पंडित से परामर्श करें)

  2. 2

    गणेश, लक्ष्मी और कुबेर की मूर्तियां या चित्र वेदी पर स्थापित करें

  3. 3

    व्यापारिक वस्तुएं — बही-खाते, चाबियां, डिजिटल उपकरण — वेदी के पास रखें

  4. 4

    पहले गणेश पूजा करें, फिर 16 उपचारों से लक्ष्मी और कुबेर पूजा करें

  5. 5

    व्यापार-समृद्धि मंत्रों के साथ छोटा हवन करें

  6. 6

    सभी व्यावसायिक परिसरों और उपकरणों पर पवित्र जल छिड़कें

  7. 7

    मुख्य प्रवेश द्वार पर लाल या पीला धागा (मौली) बांधें

  8. 8

    कर्मचारियों और सहयोगियों को मिठाई बांटें।

नया व्यापार पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

नया व्यापार पूजा के लाभ

व्यापार यात्रा की शुरुआत में सभी बाधाएं दूर होती हैं, धन, ग्राहक और अवसर आकर्षित होते हैं, सुचारु संचालन और विकास सुनिश्चित होता है, वित्तीय हानि और प्रतिस्पर्धियों से सुरक्षा मिलती है, और कार्यस्थल में दिव्य कृपा और सकारात्मक ऊर्जा स्थापित होती है।

FAQ — नया व्यापार पूजा विधि

प्र.क्या नया व्यापार पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, नया व्यापार पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.नया व्यापार पूजा में कितना समय लगता है?

नया व्यापार पूजा में सामान्यतः 2–3 घंटे का समय लगता है।

प्र.क्या नया व्यापार पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

नया व्यापार पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.नया व्यापार पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

शुभ दिन: अक्षय तृतीया, धनतेरस, विजयदशमी, पुष्य नक्षत्र, बुधवार या गुरुवार। अशुभ समय (राहु काल, गुलिक काल) से बचें।