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नौ ग्रह (नवग्रह), पूजा मंत्र

नवग्रह पूजा मंत्र

नवग्रह पूजा के सभी मंत्र संस्कृत में अर्थ, उच्चारण और जप संख्या सहित।

अंतिम अपडेट: 13 जून 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

नवग्रह पूजा के मंत्र

सूर्य मंत्र

7000 बार (या 108)

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

सूर्य देव को नमन।

चंद्र मंत्र

11000 बार (या 108)

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः

चंद्रमा को नमन।

नवग्रह स्तोत्र

9 बार

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।

ब्रह्मा, विष्णु, शिव, सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, सभी मेरी प्रभात शुभ करें।

मंत्र जप की सही विधि

• पूर्व या उत्तर दिशा में बैठकर जप करें।

• 108 मनकों की माला से संख्या गिनें।

• न बहुत तेज़, न बहुत धीमे, मध्यम गति से स्पष्ट उच्चारण करें।

• जप से पहले संकल्प (इरादा) स्थापित करें।

• यदि संभव हो तो एक बैठक में पूरी संख्या पूर्ण करें।

• ब्रह्म मुहूर्त (भोर 4–6 बजे) या पूजा के समय जप करने से अधिक लाभ होता है।

FAQ, नवग्रह पूजा मंत्र

प्र.नवग्रह पूजा में सबसे महत्वपूर्ण मंत्र कौन सा है?

नवग्रह पूजा का प्रमुख मंत्र है, सूर्य मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः। इसे 7000 बार (या 108) जपें।

प्र.क्या नए लोग भी ये मंत्र जप सकते हैं?

हाँ, ये मंत्र सभी के लिए हैं। यदि संस्कृत उच्चारण कठिन लगे तो देवता का नाम सच्चे मन से जपना भी उतना ही प्रभावी है।

प्र.मंत्र मन में जपें या ज़ोर से?

दोनों प्रभावी हैं। पूजा में ज़ोर से जप (वाचिक जप) करें। मानसिक जप (मानसिक जप) सबसे शक्तिशाली माना जाता है।