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माँ लक्ष्मी — पूजा मंत्र

लक्ष्मी पूजा मंत्र

लक्ष्मी पूजा के सभी मंत्र संस्कृत में अर्थ, उच्चारण और जप संख्या सहित।

अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

लक्ष्मी पूजा के मंत्र

लक्ष्मी बीज मंत्र

108 बार

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

महालक्ष्मी को नमन, जो कमल में निवास करती हैं और समृद्धि प्रदान करती हैं।

श्री सूक्त मंत्र

16 बार

हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह।

हे जातवेद, सुनहरे वर्ण वाली, चाँद जैसी चमकदार लक्ष्मी को मेरे पास बुलाएं।

लक्ष्मी गायत्री

108 बार

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्

महालक्ष्मी, विष्णु पत्नी का ध्यान करते हैं। लक्ष्मी हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।

मंत्र जप की सही विधि

• पूर्व या उत्तर दिशा में बैठकर जप करें।

• 108 मनकों की माला से संख्या गिनें।

• न बहुत तेज़, न बहुत धीमे — मध्यम गति से स्पष्ट उच्चारण करें।

• जप से पहले संकल्प (इरादा) स्थापित करें।

• यदि संभव हो तो एक बैठक में पूरी संख्या पूर्ण करें।

• ब्रह्म मुहूर्त (भोर 4–6 बजे) या पूजा के समय जप करने से अधिक लाभ होता है।

FAQ — लक्ष्मी पूजा मंत्र

प्र.लक्ष्मी पूजा में सबसे महत्वपूर्ण मंत्र कौन सा है?

लक्ष्मी पूजा का प्रमुख मंत्र है — लक्ष्मी बीज मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः। इसे 108 बार जपें।

प्र.क्या नए लोग भी ये मंत्र जप सकते हैं?

हाँ, ये मंत्र सभी के लिए हैं। यदि संस्कृत उच्चारण कठिन लगे तो देवता का नाम सच्चे मन से जपना भी उतना ही प्रभावी है।

प्र.मंत्र मन में जपें या ज़ोर से?

दोनों प्रभावी हैं। पूजा में ज़ोर से जप (वाचिक जप) करें। मानसिक जप (मानसिक जप) सबसे शक्तिशाली माना जाता है।