भगवान विष्णु, भगवान शिव और कार्तिक देवता — पूजा विधि
कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि
कार्तिक पूर्णिमा पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा पूजा करने की सही वैदिक विधि।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
कार्तिक पूर्णिमा पूजा — चरण दर चरण विधि
- 1
सूर्योदय से पहले उठकर नदी, तालाब या कुंड में स्नान करें (घर पर हों तो गंगाजल मिलाएं)।
- 2
उगते सूर्य को अर्घ्य दें।
- 3
तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और तुलसी पूजा करें।
- 4
विष्णु और शिव की छवियों से वेदी सजाएं।
- 5
सत्यनारायण कथा या शिव पंचाक्षर का पाठ करें।
- 6
संध्या काल में जल के पास या घर के प्रवेश द्वार पर 108 मिट्टी के दीपक जलाएं।
- 7
नदी को दीप दान करें।
- 8
प्रसाद के रूप में खीर या मिठाई वितरित करें।
कार्तिक पूर्णिमा पूजा के महत्वपूर्ण नियम
• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।
• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।
• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।
• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।
कार्तिक पूर्णिमा पूजा के लाभ
अत्यधिक आध्यात्मिक पुण्य अर्जित होता है, अनेक जन्मों के पापों का नाश होता है, विष्णु और शिव दोनों का दिव्य आशीर्वाद मिलता है, शुद्ध मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य मिलता है, और दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है।
FAQ — कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि
प्र.क्या कार्तिक पूर्णिमा पूजा घर पर की जा सकती है?
हाँ, कार्तिक पूर्णिमा पूजा घर पर की जा सकती है।
प्र.कार्तिक पूर्णिमा पूजा में कितना समय लगता है?
कार्तिक पूर्णिमा पूजा में सामान्यतः 2–3 घंटे का समय लगता है।
प्र.क्या कार्तिक पूर्णिमा पूजा के लिए पंडित जरूरी है?
कार्तिक पूर्णिमा पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।
प्र.कार्तिक पूर्णिमा पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
कार्तिक पूर्णिमा (कार्तिक माह की पूर्णिमा) — एक निश्चित वार्षिक तिथि। पवित्र स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त (पूर्व-भोर) और दीप दान के लिए संध्या काल सबसे शुभ है।