विष्णु, सूर्य एवं कुलदेवता, पूजा विधि
जातकर्म संस्कार विधि
जातकर्म संस्कार की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में जातकर्म संस्कार करने की सही वैदिक विधि।
अंतिम अपडेट: 13 अगस्त 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
जातकर्म संस्कार, चरण दर चरण विधि
- 1
जन्म के तुरंत बाद, पिता एक स्वच्छ सोने के उपकरण (या सोने की अंगूठी) को शहद, घी और वैकल्पिक रूप से सोने की भस्म के मिश्रण में डुबोता है।
- 2
गृह्यसूत्रों के मंत्रों का उच्चारण करते हुए विष्णु, सूर्य और प्रजापति का आवाहन करके नवजात की जिह्वा को धीरे से स्पर्श करता है।
- 3
पिता बच्चे के कान में उसका गुप्त नाम फुसफुसाता है और तीन बार फूंकता है।
- 4
कुलदेवताओं का आवाहन कर आशीर्वाद लिया जाता है।
जातकर्म संस्कार के महत्वपूर्ण नियम
• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।
• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।
• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।
• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।
जातकर्म संस्कार के लाभ
आत्मा का परिवार और वंश में स्वागत होता है; बुद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए दिव्य आशीर्वाद मिलता है; बच्चे का कुलदेवताओं से संबंध स्थापित होता है; जन्म संबंधी अशुद्धियां दूर होती हैं; नवजात के जीवन यात्रा के लिए पवित्र आध्यात्मिक नींव तैयार होती है।
FAQ, जातकर्म संस्कार विधि
प्र.क्या जातकर्म संस्कार घर पर की जा सकती है?
हाँ, जातकर्म संस्कार घर पर की जा सकती है।
प्र.जातकर्म संस्कार में कितना समय लगता है?
जातकर्म संस्कार में सामान्यतः 20–30 मिनट का समय लगता है।
प्र.क्या जातकर्म संस्कार के लिए पंडित जरूरी है?
जातकर्म संस्कार परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।
प्र.जातकर्म संस्कार का सबसे अच्छा समय क्या है?
जन्म के तुरंत बाद, गर्भनाल काटने से पहले। यदि विलंब हो तो पहले दिन के भीतर किया जाना चाहिए। यदि जन्म समय अनुकूल हो तो शुभ लग्न देखा जाता है।