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भगवान विष्णु एवं पवित्र गाय (कामधेनु) — पूजा विधि

गोवत्स द्वादशी पूजा विधि

गोवत्स द्वादशी पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में गोवत्स द्वादशी पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवताभगवान विष्णु एवं पवित्र गाय (कामधेनु)
अवधि1–2 घंटे
शुभ समयकार्तिक कृष्ण द्वादशी (कार्तिक के कृष्ण पक्ष का बारहवां दिन)

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

गोवत्स द्वादशी पूजा — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    गोवत्स द्वादशी की सुबह स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें

  2. 2

    गाय और बछड़े को खोजें और उनके आसपास की जगह साफ करें

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    गाय और बछड़े को माला से सजाएं और उनके माथे पर रोली और हल्दी लगाएं

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    गाय को ताजी घास, गुड़, गेहूं की रोटी और तिल अर्पित करें

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    अगरबत्ती और दीया जलाएं

  6. 6

    भगवान विष्णु की प्रार्थना करें और गोवत्स द्वादशी व्रत कथा पढ़ें

  7. 7

    गाय और बछड़े की तीन बार परिक्रमा करें

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    दिनभर व्रत रखें, केवल एक बार भोजन करें और दूध व डेयरी उत्पादों से परहेज करें

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    गोशाला में दान दें या सेवा कार्य के रूप में गायों को चारा खिलाएं।

गोवत्स द्वादशी पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

गोवत्स द्वादशी पूजा के लाभ

गोवत्स द्वादशी पूजा से भगवान विष्णु और दिव्य कामधेनु का आशीर्वाद प्राप्त होता है जो संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुख के लिए है। यह मनोकामनाएं पूर्ण करती है, भौतिक समृद्धि लाती है, बच्चों की रक्षा करती है और वंश की निरंतरता सुनिश्चित करती है। यह पूजा अपार पुण्य अर्जित करती है और कई जन्मों के पापों को धो देती है।

FAQ — गोवत्स द्वादशी पूजा विधि

प्र.क्या गोवत्स द्वादशी पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, गोवत्स द्वादशी पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.गोवत्स द्वादशी पूजा में कितना समय लगता है?

गोवत्स द्वादशी पूजा में सामान्यतः 1–2 घंटे का समय लगता है।

प्र.क्या गोवत्स द्वादशी पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

गोवत्स द्वादशी पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.गोवत्स द्वादशी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

कार्तिक कृष्ण द्वादशी (कार्तिक के कृष्ण पक्ष का बारहवां दिन), सामान्यतः अक्टूबर–नवंबर, धनतेरस से एक दिन पहले।