भगवान गणेश — पूजा मंत्र
गणेश पूजा मंत्र
गणेश पूजा के सभी मंत्र संस्कृत में अर्थ, उच्चारण और जप संख्या सहित।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
गणेश पूजा के मंत्र
गणेश बीज मंत्र
108 बारॐ गं गणपतये नमः
विघ्नहर्ता गणपति को नमन।
वक्रतुंड मंत्र
11 बारवक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
हे वक्रतुंड, महाकाय, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी प्रभु, मेरे सभी कार्यों में सदा विघ्न दूर करें।
सिद्धि विनायक मंत्र
21 बारॐ नमः सिद्धि विनायकाय सर्व कार्य कर्त्रे सर्व विघ्न प्रशमनाय सर्वजन सर्वस्त्री पुरुष आकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा
सिद्धि विनायक को नमन, जो सभी कार्य सिद्ध करते हैं और सभी विघ्न दूर करते हैं।
मंत्र जप की सही विधि
• पूर्व या उत्तर दिशा में बैठकर जप करें।
• 108 मनकों की माला से संख्या गिनें।
• न बहुत तेज़, न बहुत धीमे — मध्यम गति से स्पष्ट उच्चारण करें।
• जप से पहले संकल्प (इरादा) स्थापित करें।
• यदि संभव हो तो एक बैठक में पूरी संख्या पूर्ण करें।
• ब्रह्म मुहूर्त (भोर 4–6 बजे) या पूजा के समय जप करने से अधिक लाभ होता है।
FAQ — गणेश पूजा मंत्र
प्र.गणेश पूजा में सबसे महत्वपूर्ण मंत्र कौन सा है?
गणेश पूजा का प्रमुख मंत्र है — गणेश बीज मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः। इसे 108 बार जपें।
प्र.क्या नए लोग भी ये मंत्र जप सकते हैं?
हाँ, ये मंत्र सभी के लिए हैं। यदि संस्कृत उच्चारण कठिन लगे तो देवता का नाम सच्चे मन से जपना भी उतना ही प्रभावी है।
प्र.मंत्र मन में जपें या ज़ोर से?
दोनों प्रभावी हैं। पूजा में ज़ोर से जप (वाचिक जप) करें। मानसिक जप (मानसिक जप) सबसे शक्तिशाली माना जाता है।