भगवान विष्णु — पूजा विधि
एकादशी पूजा विधि
एकादशी पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में एकादशी पूजा करने की सही वैदिक विधि।
अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा
एकादशी पूजा — चरण दर चरण विधि
- 1
दशमी (10वें दिन) सूर्यास्त से उपवास शुरू करें।
- 2
एकादशी की सुबह स्नान करें और तुलसी, पीले फूल और अगरबत्ती के साथ विष्णु की पूजा करें।
- 3
उपवास (निर्जला या फलाहार) रखें।
- 4
विष्णु सहस्रनाम या एकादशी माहात्म्य का पाठ करें।
- 5
भजन-कीर्तन के साथ रात्रि जागरण करें।
- 6
द्वादशी को पूजा के बाद व्रत खोलें।
एकादशी पूजा के महत्वपूर्ण नियम
• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।
• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।
• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।
• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।
• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।
एकादशी पूजा के लाभ
आत्मा के संचित पापों का नाश होता है, आध्यात्मिक प्रगति तीव्र होती है, उपवास से शारीरिक स्वास्थ्य सुधरता है, भगवान विष्णु की कृपा मिलती है, भौतिक इच्छाएं क्षीण होती हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
FAQ — एकादशी पूजा विधि
प्र.क्या एकादशी पूजा घर पर की जा सकती है?
हाँ, एकादशी पूजा घर पर की जा सकती है।
प्र.एकादशी पूजा में कितना समय लगता है?
एकादशी पूजा में सामान्यतः 24 घंटे का उपवास एवं 1–2 घंटे की सुबह की पूजा का समय लगता है।
प्र.क्या एकादशी पूजा के लिए पंडित जरूरी है?
एकादशी पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।
प्र.एकादशी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?
प्रत्येक एकादशी (प्रत्येक पखवाड़े का 11वां चंद्र दिन)। वैकुंठ एकादशी और निर्जला एकादशी को सबसे पवित्र माना जाता है।