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देवी लक्ष्मी एवं भगवान गणेश — पूजा विधि

दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) विधि

दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) करने की सही वैदिक विधि।

देवतादेवी लक्ष्मी एवं भगवान गणेश
अवधि1–2 घंटे
शुभ समयकार्तिक अमावस्या (दीवाली की रात) प्रदोष काल और स्थिर लग्न में। वर्ष में एक बार दीवाली पर की जाती है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    पूरे घर को दीयों, रंगोली और फूलों से सजाएं

  2. 2

    लक्ष्मी और गणेश की मूर्तियां वेदी पर स्थापित करें

  3. 3

    मूर्ति के पास नए सिक्के, बही-खाता और क़ीमती सामान रखें

  4. 4

    प्रदोष काल में गणेश पूजा से शुरू करें, फिर 16 उपचारों से लक्ष्मी पूजा करें

  5. 5

    पूरे घर में सभी दीये जलाएं

  6. 6

    लक्ष्मी चालीसा या श्री सूक्त का पाठ करें

  7. 7

    आरती करें और मिठाई प्रसाद बांटें।

दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) के लाभ

देवी लक्ष्मी को घर में स्थायी समृद्धि के लिए आमंत्रित करती है, आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं, नए व्यापारिक अवसर मिलते हैं, वर्ष भर समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है, और पूरे परिवार को सुख और सद्भाव मिलता है।

FAQ — दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) विधि

प्र.क्या दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) घर पर की जा सकती है?

हाँ, दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) घर पर की जा सकती है।

प्र.दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) में कितना समय लगता है?

दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) में सामान्यतः 1–2 घंटे का समय लगता है।

प्र.क्या दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) के लिए पंडित जरूरी है?

दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.दीवाली पूजा (लक्ष्मी-गणेश पूजा) का सबसे अच्छा समय क्या है?

कार्तिक अमावस्या (दीवाली की रात) प्रदोष काल और स्थिर लग्न में। वर्ष में एक बार दीवाली पर की जाती है।