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भगवान शिव और यमराज — पूजा विधि

चतुर्दशी पूजा विधि

चतुर्दशी पूजा की संपूर्ण चरण दर चरण विधि। घर पर या मंदिर में चतुर्दशी पूजा करने की सही वैदिक विधि।

देवताभगवान शिव और यमराज
अवधि1–2 घंटे (या रात्रि भर जागरण)
शुभ समयप्रत्येक चंद्र माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी। महा शिवरात्रि सबसे शुभ है। इस दिन प्रदोष काल और मध्यरात्रि पूजा के लिए सर्वोत्तम समय हैं।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

चतुर्दशी पूजा — चरण दर चरण विधि

  1. 1

    सूर्योदय से अगले दिन तक उपवास रखें

  2. 2

    शिव लिंग का पंचामृत से अभिषेक करें

  3. 3

    बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें

  4. 4

    शिव पंचाक्षर मंत्र का 108 बार जाप करें

  5. 5

    रात्रि जागरण करें और अगले दिन प्रातः व्रत खोलें।

चतुर्दशी पूजा के महत्वपूर्ण नियम

• पूजा से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।

• पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करें।

• पूजा के दौरान मोबाइल और अन्य विकर्षण दूर रखें।

• मासिक धर्म के दौरान महिलाएं मुख्य अनुष्ठान में भाग न लें।

• एकाग्र और भक्तिपूर्ण मन से पूजा करें।

• एक बार शुरू की गई पूजा अधूरी न छोड़ें।

चतुर्दशी पूजा के लाभ

जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिलती है, अकाल मृत्यु से रक्षा होती है, पापों का नाश होता है, आध्यात्मिक उन्नति होती है, पितरों को शांति मिलती है और मोक्ष के लिए शिव की कृपा प्राप्त होती है।

FAQ — चतुर्दशी पूजा विधि

प्र.क्या चतुर्दशी पूजा घर पर की जा सकती है?

हाँ, चतुर्दशी पूजा घर पर की जा सकती है।

प्र.चतुर्दशी पूजा में कितना समय लगता है?

चतुर्दशी पूजा में सामान्यतः 1–2 घंटे (या रात्रि भर जागरण) का समय लगता है।

प्र.क्या चतुर्दशी पूजा के लिए पंडित जरूरी है?

चतुर्दशी पूजा परिवार के मुखिया द्वारा की जा सकती है, लेकिन जटिल अनुष्ठानों के लिए अनुभवी पंडित की सहायता लेना उचित है।

प्र.चतुर्दशी पूजा का सबसे अच्छा समय क्या है?

प्रत्येक चंद्र माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी। महा शिवरात्रि सबसे शुभ है। इस दिन प्रदोष काल और मध्यरात्रि पूजा के लिए सर्वोत्तम समय हैं।