तांत्रिक मंत्र · माँ त्रिपुरा भैरवी (षष्ठ महाविद्या)
त्रिपुरा भैरवी मंत्र
Tripura Bhairavi Mantra
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ ह्रीं भैरव्यै नमः
रोमन लिपि
Om Hrīṃ Bhairavyai Namaḥ
अर्थ
ओम, माँ भैरवी को प्रणाम — भयंकर, भयानक और परम मंगलकारी। ह्रीं माया-शक्ति बीज है। भैरवी का अर्थ है "जो भयानक/विस्मयकारी है" — वह शक्ति जो अज्ञान और भ्रम को उनकी जड़ से नष्ट करती है। त्रिपुरा उनके तीन अवस्थाओं पर शासन को संदर्भित करती है: जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
त्रिपुरा भैरवी मंत्र के लाभ
- ·गहरी जड़ें जमाई नकारात्मक प्रवृत्तियों, लतों और आत्म-विनाशकारी प्रवृत्तियों को नष्ट करती है
- ·भयंकर साहस और भय को उसकी जड़ से दूर करने की शक्ति प्रदान करती है
- ·सुरक्षा के लिए अत्यंत शक्तिशाली — दिव्य ऊर्जा की अभेद्य ढाल बनाती है
- ·कुंडलिनी शक्ति जागृत करती है और आध्यात्मिक विकास को नाटकीय रूप से तेज करती है
- ·कार्मिक बाधाओं को विघटित करती है और संचित नकारात्मक कर्म को शुद्ध करती है
- ·शत्रुओं, कानूनी लड़ाइयों और सभी विरोधों पर विजय प्रदान करती है
जाप विधि
- 1.दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके बैठें — भैरवी दक्षिण से जुड़ी हैं, यम और परिवर्तन की दिशा
- 2.देवी को लाल गुड़हल के फूल, लाल सिंदूर, कुमकुम और लाल कपड़ा अर्पित करें
- 3.यदि उपलब्ध हो तो लाल मूंगे की माला या माणिक माला; अन्यथा लाल चंदन की माला
- 4.काली पूजा, नवरात्रि (विशेष रूप से पहली तीन रातें) और अमावस्या की रातों में जपें
- 5.अभ्यास अवधि के दौरान सख्त ब्रह्मचर्य और आहार अनुशासन बनाए रखें
- 6.भयंकर भैरवी की कल्पना करें जो खोपड़ियों की माला पहने, फंदा, अंकुश और खोपड़ी का कप लेकर चिता पर विराजमान हैं
जाप का सर्वोत्तम समय
अमावस्या की रातें। नवरात्रि (पहली तीन रातें)। मध्यरात्रि। मंगलवार और शनिवार शक्तिशाली हैं। काली पूजा के दौरान।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार (1 माला)। सुरक्षा अनुष्ठानों के लिए: 1008 बार। पुरश्चरण: 10 लाख जाप।
सामान्य प्रश्न
प्र.महाविद्याओं में त्रिपुरा भैरवी कौन हैं?
त्रिपुरा भैरवी दस महाविद्याओं में से छठी हैं — देवी का भयंकर, भयानक पहलू जो चेतना की तीन अवस्थाओं पर शासन करती है। वे वह शक्ति हैं जो तीव्रता और वास्तविकता के साथ सीधे टकराव के माध्यम से अज्ञान को विघटित करती है।
प्र.क्या त्रिपुरा भैरवी मंत्र खतरनाक है?
भैरवी जैसी उग्र देवियों के तांत्रिक मंत्र शक्तिशाली हैं और मजबूत प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं। "ॐ ह्रीं भैरव्यै नमः" एक सामान्य भक्ति रूप है जो ईमानदार आध्यात्मिक साधकों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
प्र.ज्योतिष में भैरवी किसलिए उपयोग की जाती है?
वैदिक ज्योतिष में भैरवी मंगल, शनि, राहु और केतु से जुड़ी हैं। उनका मंत्र तब अनुशंसित है जब किसी व्यक्ति की कुंडली में इन ग्रहों से गंभीर पीड़ा हो, विशेष रूप से राहु/केतु दशा, साढ़ेसाती या अशुभ ग्रहों के 6, 8 या 12वें भाव में होने पर।