तांत्रिक मंत्र · माँ मातंगी (नवम महाविद्या)
मातंगी मंत्र
Matangi Mantra
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ ह्रीं ऐं भगवती मातंगेश्वरी श्रीं स्वाहा
रोमन लिपि
Om Hrīṃ Aiṃ Bhagavatī Māṭaṅgeśvarī Śrīṃ Svāhā
अर्थ
ओम, सभी कलाओं और आंतरिक ज्ञान की स्वामिनी दिव्य माँ मातंगी को प्रणाम। ह्रीं शक्ति बीज है; ऐं सरस्वती और परम ज्ञान का बीज है; श्रीं दिव्य अनुग्रह और समृद्धि का आह्वान करता है। साथ मिलकर वे वाणी, रचनात्मकता और सभी कलाओं पर प्रभुत्व जागृत करते हैं।
अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
मातंगी मंत्र के लाभ
- ·वाणी, भाषा, संगीत और सभी प्रदर्शन कलाओं में निपुणता प्रदान करती है
- ·असाधारण रचनात्मक बुद्धि और कलात्मक प्रतिभा जागृत करती है
- ·अनुनय की शक्ति देती है — सभी वाणी में ध्यान और सम्मान आकर्षित होता है
- ·शिक्षा, अध्ययन और ज्ञान प्राप्ति में बाधाएँ दूर होती हैं
- ·सामाजिक वर्जनाओं से मुक्त करती है और लज्जा से आजादी दिलाती है
- ·लेखकों, गायकों, वक्ताओं, संगीतकारों और सभी रचनात्मक पेशेवरों के लिए शक्तिशाली
जाप विधि
- 1.उत्तर दिशा की ओर मुँह करके बैठें — मातंगी उत्तर दिशा और बुध ऊर्जा से जुड़ी हैं
- 2.हरी वस्तुएँ अर्पित करें: हरा कपड़ा, हरा चना, हरी सब्जियाँ और सुगंधित फूल
- 3.स्फटिक या चंदन की माला का उपयोग करें; सर्वोत्तम परिणाम के लिए सायंकालीन संध्या में जपें
- 4.मातंगी "उच्छिष्ट" (बचा हुआ/इस्तेमाल किया हुआ) भोग स्वीकार करती हैं — देवताओं में अनोखा
- 5.हार्दिक रचनात्मक इरादे के साथ जपें — यदि संभव हो तो जाप के दौरान अपना वाद्य यंत्र या कलम पकड़ें
- 6.प्रतिबद्ध साधना के लिए 41 दिनों तक प्रतिदिन 108 जाप पूरे करें
जाप का सर्वोत्तम समय
सायंकालीन संध्या। शुक्रवार और बुधवार शुभ हैं। नवरात्रि के दौरान (विशेष रूप से नवम दिन)। बुध के घंटे सबसे अनुकूल हैं।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार (1 माला)। विस्तारित अभ्यास: 1008 बार। पुरश्चरण: 10 लाख जाप।
सामान्य प्रश्न
प्र.दश महाविद्या में मातंगी कौन हैं?
मातंगी दश महाविद्याओं में नवम हैं — देवी के तांत्रिक रूप जो दिव्य शक्ति के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे सरस्वती की तांत्रिक समकक्ष हैं, वाणी, कला, संगीत और आंतरिक ज्ञान पर शासन करती हैं।
प्र.मातंगी मंत्र किसलिए उपयोग किया जाता है?
मातंगी मंत्र मुख्य रूप से वाणी और कलाओं पर निपुणता प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है। संगीतकार, गायक, लेखक, कवि, वक्ता और प्रदर्शन कलाओं के विद्यार्थी पारंपरिक रूप से मातंगी की उपासना करते हैं।
प्र.क्या दीक्षा के बिना मातंगी मंत्र जपना सुरक्षित है?
तांत्रिक मंत्र पारंपरिक रूप से गुरु से दीक्षा में दिए जाते हैं। हालांकि, "ॐ ऐं मातंग्यै नमः" सामान्य भक्तिपूर्ण उपयोग के लिए सुरक्षित माना जाता है। पूर्ण तांत्रिक रूप के लिए योग्य शिक्षक का मार्गदर्शन अनुशंसित है।