पौराणिक मंत्र · भगवान कार्तिकेय (मुरुगन)
कार्तिकेय मंत्र — ॐ शरवणभव
Kartikeya Mantra
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ शरवणभव कार्तिकेय गायत्री: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महासेनाय धीमहि तन्नो षण्मुखः प्रचोदयात्
रोमन लिपि
Om Sharavanabhava Kartikeya Gayatri: Om Tatpurushaya Vidmahe Mahasenaya Dhimahi Tanno Shanmukhah Prachodayat
अर्थ
ॐ। शरवणभव (सरकंडे के वन में जन्मे)। कार्तिकेय गायत्री: हम सर्वोच्च पुरुष को जानते हैं, महासेना (महान सेना के कमांडर) का ध्यान करते हैं — षण्मुख (छह मुखों वाले) हमें प्रेरित और प्रकाशित करें।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
कार्तिकेय मंत्र — ॐ शरवणभव के लाभ
- ·कार्तिकेय युद्ध और विजय के देव हैं — दिव्य सेनाओं के कमांडर
- ·सभी युद्धों, प्रतियोगिताओं और संघर्षों में विजय मिलती है
- ·शत्रुओं, बाधाओं और गहरी नकारात्मकता पर विजय में मदद
- ·शिव और पार्वती के पुत्र — शिव की बुराई के विनाश और पार्वती की कृपा दोनों का आह्वान
- ·दक्षिण भारत (मुरुगन के रूप में) और श्रीलंका में विशेष रूप से पूजित
- ·मंगल ग्रह कार्तिकेय द्वारा शासित है — यह मंत्र मंगल दोष के लिए शक्तिशाली
जाप विधि
- 1.मंगलवार सबसे शुभ (मंगल का दिन — कार्तिकेय मंगल के स्वामी)
- 2.स्कंद षष्ठी (तमिलनाडु में 6 दिन का त्योहार) सबसे शक्तिशाली अवधि
- 3.लाल फूल, लाल जामुन (जैसे कुमकुम) और वेल (कार्तिकेय का भाला प्रतीक) अर्पित करें
- 4.जाप के दौरान पूर्व या ईशान दिशा में मुँह करें
- 5.लाल मूँगे की माला
- 6.परीक्षा, प्रतियोगिता या युद्ध से पहले: 21 बार जपें
जाप का सर्वोत्तम समय
मंगलवार। स्कंद षष्ठी (दक्षिण भारत में अक्टूबर/नवंबर)। प्रतियोगिताओं से पहले।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार। प्रतियोगिताओं से पहले: 21 बार। स्कंद षष्ठी: प्रत्येक दिन 1008 बार।
सामान्य प्रश्न
प्र.क्या कार्तिकेय, मुरुगन और स्कंद एक ही देव हैं?
हाँ। कार्तिकेय, मुरुगन, स्कंद, सुब्रह्मण्य और षण्मुख सभी एक ही देव के नाम हैं — शिव और पार्वती के पुत्र, दिव्य सेना के कमांडर। उत्तर भारत में कार्तिकेय, दक्षिण भारत में मुरुगन के नाम से जाने जाते हैं।