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वैदिक मंत्र · माँ दुर्गा
दुर्गा गायत्री मंत्र
Durga Gayatri Mantra
प्रकारवैदिक मंत्र
देवतामाँ दुर्गा
अक्षर24
संस्कृत (देवनागरी)
ॐ गिरिजायै विद्महे शिवप्रियायै धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्
रोमन लिपि
Om Girijayai Vidmahe Shivapriyayai Dhimahi Tanno Durga Prachodayat
अर्थ
हम गिरिजा (पर्वत की पुत्री, पार्वती/दुर्गा) को जानते हैं, शिव की प्रिया का ध्यान करते हैं — दुर्गा माँ हमें प्रेरित और प्रकाशित करें।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र
दुर्गा गायत्री मंत्र के लाभ
- ·सुरक्षा, साहस और दैवीय कृपा के लिए दुर्गा के गायत्री रूप का आह्वान
- ·दुर्गा बीज मंत्र से अधिक सात्विक — दैनिक अभ्यास के लिए उपयुक्त
- ·दिव्य माँ की शक्ति से बाधाएँ और शत्रु दूर होते हैं
- ·कुंडली में मंगल मजबूत होता है
- ·शक्ति, स्वतंत्रता और दैवीय सुरक्षा चाहने वाली महिलाओं के लिए आदर्श
- ·नवरात्रि में पूर्ण दुर्गा साधना के भाग के रूप में शक्तिशाली
जाप विधि
- 1.नवरात्रि, मंगलवार और शुक्रवार को जपें
- 2.पूर्व दिशा में, लाल कपड़े पर बैठें, लाल गुड़हल के फूल चढ़ाएँ
- 3.घी का दीपक जलाएँ और दुर्गा माँ को कुमकुम अर्पित करें
- 4.मूँगे की माला से गिनती करें
- 5.दुर्गा बीज मंत्र से पहले या बाद में एक ही सत्र में जप सकते हैं
- 6.कठिन समय में दिव्य माँ की सुरक्षा का आह्वान करने के लिए जपें
जाप का सर्वोत्तम समय
नवरात्रि। मंगलवार और शुक्रवार। ब्रह्म मुहूर्त। अष्टमी तिथि।
अनुशंसित जाप संख्या
प्रतिदिन 108 बार। नवरात्रि: 9 रातों में से प्रत्येक रात 108 बार।
सामान्य प्रश्न
प्र.दुर्गा गायत्री और दुर्गा बीज मंत्र में क्या अंतर है?
दुर्गा गायत्री वैदिक ध्यान मंत्र है — सात्विक और सौम्य, दैनिक अभ्यास के लिए। दुर्गा बीज मंत्र तांत्रिक बीज मंत्र है — तीव्र सुरक्षा के लिए, नवरात्रि में विशेष।