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तांत्रिक मंत्र · माँ भुवनेश्वरी (4वीं महाविद्या)

भुवनेश्वरी मंत्र

Bhuvaneshwari Mantra

प्रकारतांत्रिक मंत्र
देवतामाँ भुवनेश्वरी (4वीं महाविद्या)
अक्षर8

संस्कृत (देवनागरी)

ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः

रोमन लिपि

Om Hreem Bhuvaneshvaryai Namah

अर्थ

ॐ। ह्रीं (माया बीज — दिव्य सृजनात्मक शक्ति)। भुवनेश्वरी को नमस्कार — ब्रह्मांड की रानी, जो स्वयं ब्रह्मांड है (भुवन = जगत, ईश्वरी = शासक/देवी)। वे संपूर्ण सृष्टि को अपने रूप में धारण करती हैं।

अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · पारंपरिक वैदिक मंत्र

भुवनेश्वरी मंत्र के लाभ

  • ·भुवनेश्वरी अंतरिक्ष देवी हैं — वे आकाश/ईथर तत्व का अवतार हैं
  • ·मन अनंत संभावनाओं के लिए खुलता है और सीमा की भावना दूर होती है
  • ·भौतिक समृद्धि मिलती है — वे भौतिक जगत पर राज करती हैं
  • ·प्रकट करने के लिए ब्रह्मांड की सृजनात्मक शक्ति का आह्वान
  • ·नेतृत्व भूमिकाओं में लोगों के लिए शक्तिशाली — वे शाब्दिक रूप से विश्व-शासक हैं
  • ·अभाव, संकुचन और सीमा की भावनाएँ दूर होती हैं

जाप विधि

  1. 1.शुक्रवार और गुरुवार प्रातः शुभ
  2. 2.गुलाबी कमल, चमेली और सुगंधित फूल अर्पित करें
  3. 3.स्फटिक या गुलाब क्वार्ट्ज माला
  4. 4.पूर्व दिशा में; संपूर्ण ब्रह्मांड को देवी के शरीर के रूप में देखें
  5. 5.मंत्र अपने आप में पूर्ण है — विस्तृत अनुष्ठान आवश्यक नहीं
  6. 6.रचनात्मक परियोजनाओं, व्यावसायिक निर्णयों या नेतृत्व चुनौतियों से पहले आदर्श

जाप का सर्वोत्तम समय

शुक्रवार प्रातः। नवरात्रि चौथी रात। पूर्णिमा की रात।

अनुशंसित जाप संख्या

प्रतिदिन 108 बार। विशिष्ट प्रकटीकरण लक्ष्यों के लिए: प्रतिदिन 108 बार की 40 दिन साधना।

सामान्य प्रश्न

प्र.भुवनेश्वरी का अन्य देवियों से क्या संबंध है?

भुवनेश्वरी आदिम आकाश का प्रतिनिधित्व करती हैं जिससे सारी सृष्टि उत्पन्न होती है। उनका बीज ह्रीं लक्ष्मी और दुर्गा मंत्रों में भी पाया जाता है। 4वीं महाविद्या के रूप में वे ब्रह्मांड के साथ प्रत्यक्ष पहचान के माध्यम से माया के उत्थान का प्रतिनिधित्व करती हैं।

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