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वैदिक ज्योतिष · सम्पूर्ण गाइड

वैदिक ज्योतिष में 9 ग्रह (नवग्रह): अर्थ, गुण और कारकत्व

संक्षिप्त उत्तर

वैदिक ज्योतिष में नवग्रह हैं: सूर्य (आत्मा/अधिकार), चंद्र (मन/भावनाएँ), मंगल (ऊर्जा/साहस), बुध (बुद्धि/संचार), गुरु (ज्ञान/विस्तार), शुक्र (प्रेम/विलास), शनि (अनुशासन/कर्म), राहु (सांसारिक इच्छाएँ), केतु (आध्यात्मिकता/वैराग्य)।

अंतिम समीक्षा: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र · फलदीपिका

वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रह — नवग्रह — मानव जीवन की ब्रह्मांडीय नाटिका के मुख्य पात्र हैं। ये हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु। पश्चिमी ज्योतिष के विपरीत, वैदिक ज्योतिष यूरेनस, नेप्च्यून या प्लूटो का उपयोग नहीं करता।

ग्रह क्यों कहते हैं?

"ग्रह" शब्द संस्कृत की "ग्रह" धातु से बना है जिसका अर्थ है "पकड़ना" या "ग्रहण करना"। ये ब्रह्मांडीय शक्तियाँ मानव भाग्य और कर्म को आकार देती हैं।

नवग्रहों का परिचय

सूर्य: आत्मा, अहंकार, पिता, अधिकार और जीवन शक्ति का कारक। सिंह राशि का स्वामी, मेष में उच्च, तुला में नीच।

चंद्र: मन, भावनाएँ, माता और जनमानस का कारक। कर्क राशि का स्वामी, वृषभ में उच्च, वृश्चिक में नीच। जन्म के समय चंद्रमा की राशि ही आपकी राशि है।

मंगल: ऊर्जा, साहस, भूमि, भाई और सेना का कारक। मेष और वृश्चिक का स्वामी, मकर में उच्च, कर्क में नीच।

बुध: बुद्धि, संचार, व्यापार और गणित का कारक। मिथुन और कन्या का स्वामी, कन्या में उच्च, मीन में नीच।

गुरु: ज्ञान, विस्तार, धर्म, संतान और भाग्य का कारक। सर्वाधिक शुभ ग्रह। धनु और मीन का स्वामी, कर्क में उच्च, मकर में नीच।

शुक्र: प्रेम, सौंदर्य, विवाह, कला और विलास का कारक। वृषभ और तुला का स्वामी, मीन में उच्च, कन्या में नीच।

शनि: अनुशासन, विलंब, कर्म और आयु का कारक। महान शिक्षक। मकर और कुंभ का स्वामी, तुला में उच्च, मेष में नीच। साढ़े साती की 7.5 वर्षीय अवधि शनि की विशेष पारगमन स्थिति है।

राहु: सांसारिक इच्छाएँ, भ्रम, विदेश और प्रौद्योगिकी का कारक। छाया ग्रह। जो भाव को छूता है उसे तीव्र करता है।

केतु: वैराग्य, आध्यात्मिकता, मोक्ष और गूढ़ विद्याओं का कारक। राहु के विपरीत स्थित। मोक्षकारक ग्रह।

प्राकृतिक शुभ और क्रूर ग्रह

प्राकृतिक शुभ: गुरु, शुक्र, पूर्ण चंद्र, शुभ-युक्त बुध

प्राकृतिक क्रूर: शनि, मंगल, सूर्य, राहु, केतु, अमावस्या का चंद्र

सामान्य प्रश्न

वैदिक ज्योतिष में केवल 9 ग्रह क्यों हैं?

वैदिक ज्योतिष सात दृश्य ग्रहों और गणितीय बिंदुओं राहु-केतु का उपयोग करता है। बाहरी ग्रह (यूरेनस, नेप्च्यून) नग्न आँखों से दिखाई नहीं देते थे, इसलिए प्राचीन शास्त्र में शामिल नहीं हैं।

सबसे शक्तिशाली ग्रह कौन सा है?

गुरु (बृहस्पति) प्राकृतिक रूप से सर्वाधिक शुभ ग्रह है। परंतु शक्ति संदर्भ पर निर्भर है — लग्नेश, आत्मकारक और दशा स्वामी अपने-अपने संदर्भ में सर्वाधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

राहु-केतु क्या हैं?

राहु और केतु वास्तविक ग्रह नहीं, बल्कि गणितीय बिंदु (चंद्र पात) हैं — जहाँ चंद्रमा की कक्षा सूर्य के मार्ग (क्रांतिवृत्त) को काटती है। ये सदैव परस्पर विपरीत और वक्री रहते हैं।

उच्च और नीच ग्रह क्या होते हैं?

प्रत्येक ग्रह एक राशि में उच्च (अधिकतम शक्ति) और एक में नीच (न्यूनतम शक्ति) होता है। उदाहरण: गुरु कर्क में उच्च, मकर में नीच। यह कुंडली पठन का महत्वपूर्ण कारक है।

मेरी कुंडली में कौन से ग्रह मजबूत हैं?

ग्रह बल का आकलन षड्बल, राशि स्थान (स्वराशि/उच्च बनाम नीच), भाव स्थान (केंद्र/त्रिकोण शुभ), शुभ दृष्टि और दिग्बल से होता है।

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