वैदिक ज्योतिष · शास्त्रीय मार्गदर्शिका
ज्योतिष सीखें
वैदिक ज्योतिष समझने के लिए चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका — पहली कुंडली पढ़ने से लेकर ग्रह दशाओं को समझने तक। शास्त्रीय ग्रंथों पर आधारित, आधुनिक पाठकों के लिए लिखी गई।
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कुंडली कैसे पढ़ें: सम्पूर्ण चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका
कुंडली पढ़ने के लिए पहले लग्न (प्रथम भाव) पहचानें, फिर 12 भावों में ग्रहों की स्थिति देखें, प्रत्येक भाव की राशि जानें और ग्रहों की दृष्टि व युति का विश्लेषण करें।
5 प्रश्न · 6 चरण
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मेरी राशि कैसे जानें: नाम या जन्म तिथि से राशि पता करें
आपकी राशि आपके जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से निर्धारित होती है। जन्म तिथि, समय और स्थान से ऑनलाइन कैलकुलेटर द्वारा राशि जानी जा सकती है। भारतीय परंपरा में नाम के पहले अक्षर से भी राशि तय होती है।
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ज्योतिष में 12 भाव: अर्थ, कारकत्व और ग्रह
वैदिक ज्योतिष के 12 भाव मानव जीवन के सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं: प्रथम (स्वयं), द्वितीय (धन), तृतीय (भाई-साहस), चतुर्थ (घर-माता), पंचम (संतान-बुद्धि), षष्ठ (रोग-शत्रु), सप्तम (विवाह), अष्टम (आयु-परिवर्तन), नवम (भाग्य-धर्म), दशम (कार्य), एकादश (लाभ), द्वादश (व्यय-मोक्ष)।
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वैदिक ज्योतिष में 9 ग्रह (नवग्रह): अर्थ, गुण और कारकत्व
वैदिक ज्योतिष में नवग्रह हैं: सूर्य (आत्मा/अधिकार), चंद्र (मन/भावनाएँ), मंगल (ऊर्जा/साहस), बुध (बुद्धि/संचार), गुरु (ज्ञान/विस्तार), शुक्र (प्रेम/विलास), शनि (अनुशासन/कर्म), राहु (सांसारिक इच्छाएँ), केतु (आध्यात्मिकता/वैराग्य)।
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महादशा क्या है? विंशोत्तरी दशा पद्धति की सम्पूर्ण व्याख्या
महादशा वैदिक ज्योतिष की विंशोत्तरी दशा पद्धति में मुख्य ग्रह अवधि है। 9 ग्रहों में से प्रत्येक 6-20 वर्षों की मुख्य अवधि का नेतृत्व करता है। कुल 120 वर्षों का चक्र जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से शुरू होता है।
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ज्योतिष में योग क्या है? सभी प्रकार के योग और उनके प्रभाव
वैदिक ज्योतिष में योग वह ग्रह संयोजन है जो जन्म कुंडली में विशिष्ट फल देता है — अत्यधिक शुभ (राजयोग, धन योग) या चुनौतीपूर्ण (दारिद्र्य योग, ग्रहण योग)। योग भाव स्वामियों, ग्रह स्थितियों और विशेष युतियों/दृष्टियों से बनते हैं।
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वैदिक ज्योतिष में नए हैं? पहले अपनी राशि जानें, फिर कुंडली पढ़ना सीखें। 12 भाव और 9 ग्रह समझने से आपको किसी भी जन्म कुंडली की व्याख्या करने की नींव मिलेगी।
सभी गाइड बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS), फलदीपिका और जातक पारिजात — वैदिक ज्योतिष के मूल ग्रंथों पर आधारित हैं।