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वैदिक ज्योतिष एवं ज्योतिष गणना

मौसमी त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

विशु

देवता भगवान विष्णु (कृष्ण गुरुवायुरप्पन के रूप में)
माह मेडम (अप्रैल — मलयालम सौर कैलेंडर, मेडम का पहला दिन)
क्षेत्र केरल (और केरलीय प्रवासी)

संक्षिप्त परिचय

विशु केरल का नव वर्ष है, जो मलयालम सौर माह मेडम के पहले दिन (14/15 अप्रैल) को मनाया जाता है। सबसे पवित्र अनुष्ठान विशुक्कणि है — नए साल की पहली शुभ दृष्टि — शुभ वस्तुओं का एक सावधानीपूर्वक सजाया गया प्रदर्शन जिसे रात पहले तैयार किया जाता है और सुबह सबसे पहले आँखें बंद करके देखा जाता है। माना जाता है कि विशु पर आप जो पहला दृश्य देखते हैं वह आने वाले वर्ष का भाग्य निर्धारित करता है।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

विशु केरल में खगोलीय नव वर्ष को चिह्नित करता है — सूर्य का मेडम (मेष) में प्रवेश। विशुक्कणि अनुष्ठान पूरे वर्ष के लिए समृद्धि और दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक है। विशुक्कैनीट्टम (बड़ों द्वारा बच्चों को पैसे देना) सुनिश्चित करता है कि समृद्धि सभी पीढ़ियों तक पहुँचे।

अनुष्ठान और परंपराएं

एक रात पहले: सुनहरी खीरा, नारियल, कणि कोन्ना फूल, पान के पत्ते, फल, सोना, कपड़ा, दीपक और विष्णु मूर्ति के साथ विशुक्कणि सजाएं। सुबह: भोर से पहले उठें, आँखें बंद करें और पहले कणि देखने के लिए ले जाएं। विशुक्कैनीट्टम: बड़े बच्चों और सेवकों को पैसे दें। नए कपड़े पहनें। पटाखे फोड़ें।

पारंपरिक व्यंजन

विशु साध्या (भोज)काँजी (चावल दलिया)वेप्पम्पूरसम (नीम-गुड़ का कड़वा स्टार्टर)मांपाझापुलिस्सेरी (आम करी)थोरनपायसम

सामान्य प्रश्न

प्र.विशु क्या है?

विशु केरल का नव वर्ष है, जो मलयालम सौर माह मेडम के पहले दिन (14/15 अप्रैल) को मनाया जाता है। सबसे पवित्र अनुष्ठान विशुक्कणि है — नए साल की पहली शुभ दृष्टि — शुभ वस्तुओं का एक सावधानीपूर्वक सजाया गया प्रदर्शन जिसे रात पहले तैयार किया जाता है और सुबह स...

प्र.विशु का क्या महत्व है?

विशु केरल में खगोलीय नव वर्ष को चिह्नित करता है — सूर्य का मेडम (मेष) में प्रवेश। विशुक्कणि अनुष्ठान पूरे वर्ष के लिए समृद्धि और दिव्य आशीर्वाद का प्रतीक है। विशुक्कैनीट्टम (बड़ों द्वारा बच्चों को पैसे देना) सुनिश्चित करता है कि समृद्धि सभी पीढ़ियों तक पहुँचे।

प्र.विशु के अनुष्ठान क्या हैं?

एक रात पहले: सुनहरी खीरा, नारियल, कणि कोन्ना फूल, पान के पत्ते, फल, सोना, कपड़ा, दीपक और विष्णु मूर्ति के साथ विशुक्कणि सजाएं। सुबह: भोर से पहले उठें, आँखें बंद करें और पहले कणि देखने के लिए ले जाएं। विशुक्कैनीट्टम: बड़े बच्चों और सेवकों को पैसे दें। नए कपड़े पहनें। पटाखे फोड़ें।

प्र.विशु में कौन से व्यंजन बनते हैं?

विशु साध्या (भोज), काँजी (चावल दलिया), वेप्पम्पूरसम (नीम-गुड़ का कड़वा स्टार्टर), मांपाझापुलिस्सेरी (आम करी), थोरन, पायसम

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