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मौसमी त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

लोहड़ी

देवता अग्नि देव, सूर्य, दुल्हा भट्टी (लोक नायक)
माह पौष (13 जनवरी — मकर संक्रांति की पूर्व संध्या)
क्षेत्र पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली (उत्तर भारत)

संक्षिप्त परिचय

लोहड़ी 13 जनवरी की रात को मनाया जाने वाला लोकप्रिय पंजाबी शीतकालीन लोक त्योहार है — मकर संक्रांति की पूर्व संध्या — जो सर्दियों के अंत और ठंड के मौसम की चरमसीमा का प्रतीक है। सामुदायिक समारोह में बड़ा अलाव जलाया जाता है, परिवार दुल्हा भट्टी (एक पौराणिक रॉबिन हुड जैसे पंजाबी नायक) के लोकगीत गाते हैं, तिल, गुड़, पॉपकॉर्न और मुरमुरे अग्नि में अर्पित करते हैं और भांगड़ा व गिद्दा नृत्य करते हैं।

अंतिम अपडेट: 24 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

शीतकालीन अयनांत के अंत का प्रतीक — लोहड़ी के बाद दिन लंबे और गर्म होते हैं। नए बच्चे (विशेषकर बेटे) का स्वागत करने वाले परिवारों या विवाह के बाद पहली सर्दी मनाने वालों के लिए सबसे आनंदमय अवसर है। अलाव उस गर्मजोशी और प्रकाश का प्रतीक है जो सर्दियों के अंधकार को दूर करता है।

अनुष्ठान और परंपराएं

सूर्यास्त पर बड़ा सामुदायिक अलाव जलाएं। "आदर आए दिलाथर जाए!" जपते हुए अलाव की परिक्रमा करें। तिल, गुड़, मुरमुरे और रेवड़ी आग में अर्पित करें। दुल्हा भट्टी के लोहड़ी लोकगीत गाएं। भांगड़ा और गिद्दा नृत्य करें। रेवड़ी, मूंगफली और पॉपकॉर्न बाँटें।

पारंपरिक व्यंजन

रेवड़ी (तिल-गुड़ की कुरकुरी)गजक (तिल-गुड़ की पट्टी)तिल के लड्डूमूंगफलीपॉपकॉर्न (मुरमुरे)मक्की की रोटीसरसों का साग

सामान्य प्रश्न

प्र.लोहड़ी क्या है?

लोहड़ी 13 जनवरी की रात को मनाया जाने वाला लोकप्रिय पंजाबी शीतकालीन लोक त्योहार है — मकर संक्रांति की पूर्व संध्या — जो सर्दियों के अंत और ठंड के मौसम की चरमसीमा का प्रतीक है। सामुदायिक समारोह में बड़ा अलाव जलाया जाता है, परिवार दुल्हा भट्टी (एक पौराण...

प्र.लोहड़ी का क्या महत्व है?

शीतकालीन अयनांत के अंत का प्रतीक — लोहड़ी के बाद दिन लंबे और गर्म होते हैं। नए बच्चे (विशेषकर बेटे) का स्वागत करने वाले परिवारों या विवाह के बाद पहली सर्दी मनाने वालों के लिए सबसे आनंदमय अवसर है। अलाव उस गर्मजोशी और प्रकाश का प्रतीक है जो सर्दियों के अंधकार को दूर करता है।

प्र.लोहड़ी के अनुष्ठान क्या हैं?

सूर्यास्त पर बड़ा सामुदायिक अलाव जलाएं। "आदर आए दिलाथर जाए!" जपते हुए अलाव की परिक्रमा करें। तिल, गुड़, मुरमुरे और रेवड़ी आग में अर्पित करें। दुल्हा भट्टी के लोहड़ी लोकगीत गाएं। भांगड़ा और गिद्दा नृत्य करें। रेवड़ी, मूंगफली और पॉपकॉर्न बाँटें।

प्र.लोहड़ी में कौन से व्यंजन बनते हैं?

रेवड़ी (तिल-गुड़ की कुरकुरी), गजक (तिल-गुड़ की पट्टी), तिल के लड्डू, मूंगफली, पॉपकॉर्न (मुरमुरे), मक्की की रोटी, सरसों का साग

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