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मौसमी त्योहार — हिंदू पवित्र उत्सव

चेटी चंड

देवता झूलेलाल (उडेरोलाल)
माह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (मार्च/अप्रैल)
क्षेत्र विश्वभर के सिंधी समुदाय, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, सिंध (पाकिस्तान)

संक्षिप्त परिचय

चेटी चंड सिंधी नव वर्ष का पर्व है जो चैत्र माह के पहले दिन मनाया जाता है। यह सिंधी समुदाय के संरक्षक संत झूलेलाल की जयंती है, जिन्हें वरुण देव का अवतार और भगवान विष्णु की अभिव्यक्ति माना जाता है। यह उत्सव नई शुरुआत, सामुदायिक पहचान और झूलेलाल के प्रति कृतज्ञता का उत्सव है। रंगारंग जुलूस निकाले जाते हैं और नदी की पूजा की जाती है।

अंतिम अपडेट: 23 अप्रैल 2026 · स्रोत: वैदिक परंपरा

महत्व

चेटी चंड सिंधी नव वर्ष और झूलेलाल के जन्म का उत्सव है, जिन्होंने सिंधियों को जबरन धर्म परिवर्तन से बचाया था। यह सिंधी सांस्कृतिक पहचान, जल की जीवन-शक्ति और सामुदायिक सौहार्द को पुनः स्थापित करता है। झूलेलाल की पूजा से समृद्धि, शत्रुओं से रक्षा और नए वर्ष की शुभकामनाएं मिलती हैं।

अनुष्ठान और परंपराएं

बहराना (झूलेलाल का प्रतीक सजा हुआ जलपात्र) के साथ झूलेलाल जुलूस (चालीहा साहिब) निकालें। नदी (सिंधु/स्थानीय नदी) की पूजा करें। दीप और अगरबत्ती जलाएं। ठाड्री प्रसाद (मीठा भोग) चढ़ाएं। पारंपरिक सिंधी भजन गाएं। उपवास रखें या सात्विक भोजन करें। झूलेलाल मंदिर जाएं और सामुदायिक भोज में भाग लें।

पारंपरिक व्यंजन

ठाड्री (मीठा प्रसाद)साई भाजीदाल पकवानसिंधी कढ़ीसेयल माणीमिठो लोलो

सामान्य प्रश्न

प्र.चेटी चंड क्या है?

चेटी चंड सिंधी नव वर्ष का पर्व है जो चैत्र माह के पहले दिन मनाया जाता है। यह सिंधी समुदाय के संरक्षक संत झूलेलाल की जयंती है, जिन्हें वरुण देव का अवतार और भगवान विष्णु की अभिव्यक्ति माना जाता है। यह उत्सव नई शुरुआत, सामुदायिक पहचान और झूलेलाल के प्रत...

प्र.चेटी चंड का क्या महत्व है?

चेटी चंड सिंधी नव वर्ष और झूलेलाल के जन्म का उत्सव है, जिन्होंने सिंधियों को जबरन धर्म परिवर्तन से बचाया था। यह सिंधी सांस्कृतिक पहचान, जल की जीवन-शक्ति और सामुदायिक सौहार्द को पुनः स्थापित करता है। झूलेलाल की पूजा से समृद्धि, शत्रुओं से रक्षा और नए वर्ष की शुभकामनाएं मिलती हैं।

प्र.चेटी चंड के अनुष्ठान क्या हैं?

बहराना (झूलेलाल का प्रतीक सजा हुआ जलपात्र) के साथ झूलेलाल जुलूस (चालीहा साहिब) निकालें। नदी (सिंधु/स्थानीय नदी) की पूजा करें। दीप और अगरबत्ती जलाएं। ठाड्री प्रसाद (मीठा भोग) चढ़ाएं। पारंपरिक सिंधी भजन गाएं। उपवास रखें या सात्विक भोजन करें। झूलेलाल मंदिर जाएं और सामुदायिक भोज में भाग लें।

प्र.चेटी चंड में कौन से व्यंजन बनते हैं?

ठाड्री (मीठा प्रसाद), साई भाजी, दाल पकवान, सिंधी कढ़ी, सेयल माणी, मिठो लोलो

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