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वैदिक दोष मार्गदर्शिका

तिथि दोष

तिथि दोष: कारण, प्रभाव और उपाय

Tithi Dosha · Rikta Tithi Dosha · Chaturdashi Dosha

दोष का कारण

Birth on a Rikta tithi — the 4th (Chaturthi), 9th (Navami), or 14th (Chaturdashi) lunar day of either the waxing (Shukla Paksha) or waning (Krishna Paksha) fortnight. The Sanskrit term "Rikta" means empty or devoid — these tithis are ruled by Kali and considered devoid of auspicious lunar fullness.

परिचय

तिथि दोष जन्म के समय चंद्र और सूर्य की कोणीय स्थिति से उत्पन्न होता है। वैदिक पंचांग में प्रत्येक पक्ष की 15 तिथियों में से 4, 9 और 14वीं तिथि को "रिक्त" (खाली) कहा गया है — ये काली देवी के अधिपत्य में हैं और शुभ चांद्र ऊर्जा से वंचित मानी जाती हैं। मुहूर्त चिंतामणि सहित अनेक ग्रंथ इन तिथियों पर शुभ कार्य आरंभ करने का निषेध करते हैं। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी सबसे गंभीर मानी गई है। यह दोष मध्यम श्रेणी का है और इसका निवारण मुख्यतः चंद्र शांति से होता है।

प्रभाव

  • 01कार्यों की अधूरापन — परियोजनाएं और संबंध अक्सर पूर्णता से पहले रुक जाते हैं।
  • 02आर्थिक अस्थिरता — संचित धन को बनाए रखने में कठिनाई और नकदी प्रवाह में बार-बार रुकावट।
  • 03शुभ कार्यों में विघ्न — विवाह, गृहप्रवेश आदि में बार-बार स्थगन या जटिलताएं।
  • 04मातृ संबंध में शिथिलता — रिक्त तिथि जन्म माता-संतान बंधन में सूक्ष्म दूरी बना सकता है।
  • 05मानसिक अशांति और भावनात्मक अपूर्णता की अनुभूति।

अपवाद और निरसन नियम

शास्त्रीय ज्योतिष में तिथि दोष के लिए विशेष निरसन नियम दिए गए हैं जिनमें दोष बनता ही नहीं या काफी कम हो जाता है। दोष को सक्रिय मानने से पहले इन नियमों की जांच करें।

  • यदि उसी रिक्त तिथि पर अमृत सिद्धि योग हो तो दोष पूर्णतः निरस्त माना जाता है।
  • प्रबल, सुस्थित चंद्र (उच्च, स्वक्षेत्री, या केंद्र में बिना पापग्रह दृष्टि के) दोष की तीव्रता काफी कम करता है।
  • यदि जन्म नक्षत्र पुष्कर नक्षत्र हो (अश्विनी, रोहिणी, पुष्य, श्रवण, रेवती) तो नक्षत्र की शुभता तिथि दोष को निष्क्रिय करती है।
  • शिवरात्रि (माघ/फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी) पर जन्म — इस पवित्र तिथि की विशेषता दोष को मुक्त करती है।

शास्त्रीय उपाय

  • 01तिथि शांति पूजा — जन्म तिथि पर प्रतिवर्ष चंद्र कवचम् का पाठ, शिवलिंग पर श्वेत पुष्प और दूध का अर्पण।
  • 02चंद्र बीज मंत्र — "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः" 108 बार प्रतिदिन 27 दिन सोमवार से प्रारंभ।
  • 0316 सोमवार का व्रत — श्वेत आहार एकाहार, शिवलिंग के समक्ष घी का दीप।
  • 04प्रत्येक रिक्त तिथि पर श्वेत गाय को चारा खिलाना — एक वर्ष तक।
  • 05जन्म तिथि पर मासिक रूप से शिव/चंद्र मंदिर में चांदी, श्वेत वस्त्र और कपूर का दान।

सामान्य प्रश्न

क्या तिथि दोष मंगल दोष जितना गंभीर है?

नहीं। शास्त्रीय वर्गीकरण में तिथि दोष मध्यम श्रेणी का है। यह मुख्यतः कार्यों के समय और पूर्णता को प्रभावित करता है।

जन्म के लिए सबसे गंभीर रिक्त तिथि कौन सी है?

कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी — अमावस्या से ठीक पहले चंद्र अपनी न्यूनतम ज्योति में होता है। शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तीनों में सबसे कम प्रभावशाली है।

यदि मेरा जन्म रिक्त तिथि पर हुआ है तो क्या मैं शुभ कार्य कर सकता हूं?

हां। तिथि दोष आपकी जन्मकालीन ऊर्जा को प्रभावित करता है, यह सभी कार्यों पर सामान्य निषेध नहीं है।

नवमी तो दुर्गा पूजा के लिए शुभ है, फिर वह रिक्त कैसे?

यह विरोधाभास नहीं है। जो ऊर्जा सांसारिक कार्यों के लिए रिक्त है, वही उग्र देवियों की पूजा के लिए शक्तिशाली है।

जन्म तिथि कैसे ज्ञात करें?

जन्म तिथि, समय और स्थान से चंद्र-सूर्य के कोणीय अंतर की गणना की जाती है। किसी भी पंचांग या ज्योतिष सॉफ्टवेयर से जानी जा सकती है।

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