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ज्ञान
वैदिक दोष

दोष क्या होता है?

वैदिक ज्योतिष में दोष एक विशेष ग्रह स्थिति है — जन्म कुंडली में या गोचर में — जो जीवन के किसी विशेष क्षेत्र में बाधा, विलंब या कर्मिक परीक्षण लाती है। शब्द का अर्थ है "त्रुटि" या "कमी," लेकिन शास्त्रीय ज्योतिष में इसका अर्थ अधिक सूक्ष्म है: एक सशर्त कमजोरी जो तब उभरती है जब कुछ ग्रह कुछ विशेष स्थानों पर हों। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका और सारावली जैसे मूलभूत ग्रंथों में प्रत्येक प्रमुख दोष की सटीक तकनीकी परिभाषा दी गई है। महत्वपूर्ण यह है कि प्रत्येक दोष के साथ विस्तृत निरसन नियम भी दिए गए हैं — वे स्थितियां जिनमें दोष बनता ही नहीं या काफी कम हो जाता है — और उपायों की पूरी शृंखला है। यहाँ छह प्रमुख दोषों का विवरण है — मंगल, काल सर्प, शनि साढ़े साती, पितृ, गुरु चांडाल और ग्रहण दोष।

छह प्रमुख दोष

मंगल दोष

मंगल दोष

Mangal Dosha

मंगल दोष तब बनता है जब मंगल ग्रह जन्म कुंडली में लग्न, चंद्र या शुक्र से 1, 2, 4, 7, 8 या

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काल सर्प दोष

काल सर्प दोष

Kaal Sarp Dosha

काल सर्प दोष तब बनता है जब सातों शास्त्रीय ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि

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शनि दोष (साढ़े साती)

शनि दोष (साढ़े साती)

Shani Dosha (Sadesati)

साढ़े साती एक गोचर-आधारित दोष है, जन्मकुंडली का स्थायी दोष नहीं। जब शनि जन्मकालीन चंद्र रा

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पितृ दोष

पितृ दोष

Pitra Dosha

पितृ दोष तब बनता है जब जन्मकुंडली में 9वां भाव, सूर्य, या चंद्रमा पाप ग्रहों (राहु, शनि, म

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गुरु चांडाल दोष

गुरु चांडाल दोष

Guru Chandal Dosha

गुरु चांडाल दोष तब बनता है जब गुरु (बृहस्पति) और राहु एक ही भाव और राशि में स्थित हों। गुर

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ग्रहण दोष

ग्रहण दोष

Grahan Dosha

ग्रहण दोष तब बनता है जब सूर्य या चंद्रमा जन्म कुंडली में राहु या केतु के साथ एक ही भाव और

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सामान्य प्रश्न

वैदिक ज्योतिष में दोष क्या होता है?

वैदिक ज्योतिष में दोष एक विशेष ग्रह स्थिति या गोचर है जो जीवन के किसी क्षेत्र में बाधा, विलंब या कर्मिक परीक्षण लाती है। दोष स्थायी श्राप नहीं है — शास्त्रों में प्रत्येक दोष के लिए विस्तृत निरसन नियम और उपाय दिए गए हैं।

क्या सभी दोष समान रूप से गंभीर होते हैं?

नहीं। किसी भी दोष की गंभीरता पीड़क ग्रह की शक्ति, भाव स्थिति, लागू होने वाले निरसन नियमों और समग्र कुंडली बल पर निर्भर करती है। पूरी कुंडली का विश्लेषण किए बिना दोष को सक्रिय मानना उचित नहीं।

क्या दोष पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं?

शास्त्रों में विशेष पूजा, मंत्र, रत्न, व्रत और दान से दोषों को कम या निरस्त करने के उपाय बताए गए हैं। नियमित उपाय दोष के प्रभाव को काफी हद तक कम करते हैं। साढ़े साती जैसे गोचर-आधारित दोष गोचर काल समाप्त होने पर स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।

सबसे भयंकर दोष कौन-सा है?

मंगल दोष विवाह मिलान में सबसे अधिक भय उत्पन्न करता है। काल सर्प दोष अपने नाम और प्रतिष्ठा के कारण सामान्यतः सबसे डरावना माना जाता है। लेकिन शास्त्रीय ज्योतिष में कोई भी दोष सर्वश्रेष्ठ बुरा नहीं है — संदर्भ, निरसन और दशा काल सब कुछ निर्धारित करते हैं।

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