अतिथि कक्ष वास्तु — मेहमानों का स्वागत करें बिना घर की ऊर्जा बाधित किए
संक्षिप्त उत्तर
अतिथि कक्ष घर के उत्तर-पश्चिम कोने में रखें। यह दिशा (वायु) आरामदायक लेकिन अस्थायी ऊर्जा बनाती है। दक्षिण-पश्चिम में अतिथि कक्ष न रखें।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · स्रोत: वास्तु शास्त्र परंपरा
अतिथि कक्ष की स्थिति में एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण वास्तु सिद्धांत है: मेहमान आरामदायक रहें लेकिन अत्यधिक समय न बिताएं।
उत्तर-पश्चिम — अतिथि की दिशा
उत्तर-पश्चिम को वायु तत्त्व नियंत्रित करता है। यह गति और परिवर्तन से जुड़ा है — अतिथियों को आरामदायक लेकिन अस्थायी रूप से बसाता है।
क्या न करें
दक्षिण-पश्चिम में अतिथि कक्ष न रखें — यह मेहमानों को लंबे समय तक रुकने पर मजबूर करता है। उत्तर-पूर्व बहुत पवित्र है अतिथि उपयोग के लिए।
मुख्य वास्तु टिप्स
- ✓उत्तर-पश्चिम अतिथि कक्ष के लिए आदर्श दिशा है
- ✓दक्षिण-पश्चिम में अतिथि कक्ष न रखें
- ✓तटस्थ रंग: क्रीम, गर्म सफेद, हल्का पीला
- ✓पारिवारिक फोटो या व्यक्तिगत वस्तुएं न रखें
FAQ — अतिथि कक्ष वास्तु
प्र.अतिथि कक्ष दक्षिण-पश्चिम में क्यों नहीं होना चाहिए?
दक्षिण-पश्चिम घर के मुखिया की शक्ति का क्षेत्र है। यहां मेहमान रखने से वे ऊर्जात्मक रूप से प्रभुत्व ग्रहण कर लेते हैं और लंबे समय तक रहते हैं।
प्र.अतिथि कक्ष खाली रहने पर क्या उपयोग हो सकता है?
उत्तर-पश्चिम का कमरा होम ऑफिस के रूप में उत्कृष्ट है। वायु ऊर्जा संचार और निर्णय-निर्माण का समर्थन करती है।