पूर्व दिशा वास्तु — सौर शक्ति और नई शुरुआत का क्षेत्र
संक्षिप्त उत्तर
पूर्व उगते सूर्य की दिशा है और इंद्र देव द्वारा शासित है। यह यश, स्वास्थ्य और नई शुरुआत लाता है। इस क्षेत्र को खुला और साफ रखें। शौचालय और भारी निर्माण से बचें।
अंतिम अपडेट: 20 अप्रैल 2026 · स्रोत: वास्तु शास्त्र परंपरा
पूर्व वास्तु शास्त्र में सबसे शक्तिशाली दिशाओं में से एक है — यह उगते सूर्य की दिशा है। इंद्र देव इस दिशा के स्वामी हैं।
पूर्व दिशा क्या नियंत्रित करती है
पूर्व दिशा स्वास्थ्य, सामाजिक प्रतिष्ठा, पिता का कल्याण और समग्र समृद्धि को नियंत्रित करती है।
पूर्व में क्या रखें
मुख्य प्रवेश द्वार, बैठक कक्ष और पूजा कक्ष के लिए पूर्व उत्तम है।
पूर्व में क्या न करें
शौचालय और भारी निर्माण से बचें। सूर्य के प्रकाश को अवरुद्ध करने वाले बड़े वृक्ष न लगाएं।
मुख्य वास्तु टिप्स
- ✓पूर्व क्षेत्र खुला और अच्छी तरह प्रकाशित रखें
- ✓पूर्व में मुख्य प्रवेश द्वार बहुत शुभ है
- ✓शौचालय या भारी संरचनाएं पूर्व में न रखें
- ✓अध्ययन कक्ष और पूजा स्थान के लिए पूर्व उत्तम है
FAQ — पूर्व दिशा वास्तु
प्र.क्या पूर्वमुखी घर वास्तु के अनुसार अच्छा है?
हाँ — पूर्वमुखी घर बहुत शुभ माना जाता है। सुबह का सूर्य प्रकाश घर में प्रवेश करता है। निवासी अच्छे स्वास्थ्य और सामाजिक प्रतिष्ठा का आनंद लेते हैं।
प्र.घर की पूर्व दिशा में क्या रखना चाहिए?
मुख्य प्रवेश द्वार, बैठक कक्ष की खिड़कियां, अध्ययन कक्ष, पूजा कक्ष और तुलसी का पौधा।